Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
पिछले चार दशकों से डाक्टर और मरीज दोनों गलतफहमी में थे घने जंगलों के निवासियों का अपनी गुप्त संवाद तंत्र कायम है, देखें वीडियो Namo Bharat News: दिल्ली-मेरठ कॉरिडोर पर नमो भारत की 10 अतिरिक्त ट्रिप्स; अब और भी आसान होगा सफर असम में समान नागरिक संहिता विधेयक पास Border Security News: घुसपैठ और तस्करी पर नकेल; अमित शाह ने जिला अधिकारियों को सौंपी अहम जिम्मेदारी,... Modi Govt 12 Years: मोदी सरकार के केंद्र में 12 साल पूरे; भाजपा मनाएगी भव्य जश्न, 2047 का रोडमैप होग... अगले चुनाव में 33 फीसद सीट महिलाओं कोः  नारा लोकेश Ayushman Bharat Delhi: दिल्ली में 7.72 लाख से ज्यादा आयुष्मान कार्ड जारी; 10 लाख तक का मिल रहा कैशले... वामपंथी समर्थकों ने अफसरों पर हमला कर दिया Annapurna Bhandar Update: लक्ष्मी भंडार में गड़बड़ियों का दावा; बंगाल सरकार ने शुरू की नई स्कीम, जून स...

Deoghar Trikut Pahar: रोपवे हादसे के बाद त्रिकूट पहाड़ पर सन्नाटा; स्थानीय व्यापारियों की आजीविका पर गहरा संकट

देवघर: झारखंड के देवघर में स्थित त्रिकूट पहाड़, जो कभी अपनी धार्मिक आस्था और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए पर्यटकों की पहली पसंद था, आज एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। वर्ष 2022 में हुए दर्दनाक रोपवे हादसे ने इस पर्यटन स्थल की तस्वीर बदल दी है। हादसे के बाद से बने भय के माहौल ने न केवल पर्यटकों की संख्या को घटा दिया है, बल्कि यहां के स्थानीय लोगों की रोजी-रोटी पर भी गहरा संकट खड़ा कर दिया है।

📉 70 प्रतिशत तक घटी पर्यटकों की आवाजाही

स्थानीय दुकानदारों, होटल संचालकों और ऑटो ड्राइवरों का कहना है कि हादसे से पहले सावन और भादो के महीने में यहां पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ती थी, जिससे उनकी अच्छी कमाई हो जाती थी। लेकिन आज यहां पर्यटकों का आना करीब 70 प्रतिशत तक कम हो गया है। कारोबार में आई इस भारी गिरावट के चलते कई स्थानीय लोग रोजगार की तलाश में दूसरे शहरों की ओर पलायन करने को मजबूर हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले चार वर्षों से उनकी आय मानो शून्य हो गई है।

⚠️ प्रशासन के दावों पर सवाल, स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी

त्रिकूट पहाड़ स्थित मंदिर के पुजारियों का भी यही मानना है कि हादसे के बाद श्रद्धालुओं और पर्यटकों के मन में डर बैठ गया है। स्थानीय निवासियों में प्रशासन और सरकार के प्रति काफी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि चार वर्षों से केवल मरम्मत और पुनः संचालन के आश्वासन मिल रहे हैं, लेकिन धरातल पर अब तक कोई ठोस कार्य नहीं हुआ है। घोषणाएं फाइलों तक ही सीमित रह गई हैं, जबकि जमीन पर हालात बदतर होते जा रहे हैं।

🚀 क्या जल्द लौटेगी त्रिकूट पहाड़ की पुरानी चमक?

इस मामले पर जिला पर्यटन पदाधिकारी संतोष कुमार ने सफाई दी है कि त्रिकूट रोपवे को लेकर राज्य स्तर पर कार्य चल रहा है। उन्होंने बताया कि हाईकोर्ट में प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है और जल्द ही नए रोपवे के निर्माण की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। साथ ही, स्थानीय लोगों को पर्यटन से जोड़ने के लिए नई योजनाएं भी तैयार की जा रही हैं। देवघर का बाबा बैद्यनाथ धाम विश्व प्रसिद्ध है, ऐसे में त्रिकूट पहाड़ का दोबारा चालू होना न केवल पर्यटन के लिए बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने के लिए भी बेहद आवश्यक है। अब देखना यह है कि रोपवे का पुनर्निर्माण कब तक पूरा होता है।