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Delhi-Jewar RRTS: दिल्ली से जेवर एयरपोर्ट सिर्फ 21 मिनट में! यूपी सरकार ने रैपिड रेल कॉरिडोर की DPR को दी मंजूरी

लखनऊ/नोएडा: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने दिल्ली और नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) के बीच विश्वस्तरीय और तेज रफ्तार कनेक्टिविटी को अभूतपूर्व बढ़ावा देने की दिशा में एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। सूबे के औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’ ने आधिकारिक जानकारी साझा करते हुए बताया कि प्रस्तावित रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) यानी रैपिड रेल कॉरिडोर के जरिए दिल्ली से जेवर एयरपोर्ट तक का लंबा सफर भविष्य में महज 21 मिनट में पूरा किया जा सकेगा। यह महत्वाकांक्षी परियोजना उत्तर प्रदेश के बुनियादी ढांचे (Infrastructure) और सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क की सूरत को पूरी तरह बदलने वाली और एक नई ऐतिहासिक दिशा देने वाली मानी जा रही है।

🏢 पिकअप (PICUP) भवन में हुई हाई-लेवल समीक्षा बैठक: केंद्र सरकार की अंतिम स्वीकृति के लिए भेजी गई विस्तृत रिपोर्ट

औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ने यह महत्वपूर्ण जानकारी लखनऊ स्थित पिकअप (PICUP) भवन में यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) की फ्लैगशिप परियोजनाओं की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान दी। उन्होंने बताया कि दिल्ली-जेवर आरआरटीएस (RRTS) कॉरिडोर की डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) को राज्य सरकार ने अपनी कैबिनेट से पूरी तरह मंजूरी दे दी है। उत्तर प्रदेश शासन से हरी झंडी मिलने के बाद अब इस विस्तृत रिपोर्ट को आगे की अंतिम तकनीकी और वित्तीय स्वीकृति के लिए दिल्ली स्थित केंद्रीय आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय (MoHUA) को आधिकारिक तौर पर भेज दिया गया है, जहां से जल्द ही काम शुरू करने का ग्रीन सिग्नल मिलने की उम्मीद है।

🚄 दिल्ली-वाराणसी हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन कॉरिडोर भी योजना में शामिल: जेवर एयरपोर्ट टर्मिनल पर ही बनेगा डेडिकेटेड स्टेशन

समीक्षा बैठक के दौरान प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारियों ने प्रस्तुतीकरण देते हुए जानकारी दी कि इस स्वीकृत डीपीआर में भारत सरकार के प्रस्तावित दिल्ली-वाराणसी हाई-स्पीड रेल (बुलेट ट्रेन) कॉरिडोर को भी रणनीतिक रूप से शामिल किया गया है। इस दूरदर्शी योजना के तहत नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट टर्मिनल को एक विशेष डेडिकेटेड अंडरग्राउंड/एलिवेटेड स्टेशन के माध्यम से सीधे हाई-स्पीड रेल नेटवर्क से इंटरकनेक्ट (जोड़ा) किया जाएगा। इस एकीकृत परिवहन प्रणाली से भविष्य में दिल्ली, जेवर और पूर्वी उत्तर प्रदेश के बीच यात्रा के समय में भारी ऐतिहासिक कमी आएगी और वैश्विक यात्रियों को तेज, आधुनिक, पर्यावरण अनुकूल और बेहद सुविधाजनक परिवहन सुविधा मिल सकेगी।

💼 कनेक्टिविटी मजबूत होने से पश्चिमी यूपी में बढ़ेगा अरबों का निवेश: ट्रैफिक जाम और लंबी दूरी की परेशानी से मिलेगी बड़ी राहत

राज्य सरकार का दृढ़ मानना है कि इस हाई-स्पीड रैपिड रेल परियोजना के धरातल पर पूरा होने के बाद नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट की वैश्विक कनेक्टिविटी को चार चांद लग जाएंगे। इससे न केवल यात्रियों को आसानी होगी, बल्कि जेवर और यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र में बड़े पैमाने पर विदेशी निवेश, नए उद्योग, लॉजिस्टिक्स हब और वैश्विक पर्यटन को भी अभूतपूर्व बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही दिल्ली-एनसीआर, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लाखों दैनिक यात्रियों को एक्सप्रेसवे पर लगने वाले भारी ट्रैफिक जाम और लंबी दूरी की थकाऊ परेशानी से हमेशा-हमेशा के लिए बड़ी राहत मिल सकेगी।

✈️ उत्तर भारत के सबसे बड़े एविएशन हब के रूप में विकसित हो रहा है जेवर: देश की सबसे आधुनिक एयरपोर्ट परियोजना

गौरतलब है कि जेवर में बन रहा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट वर्तमान समय में देश के सबसे बड़े, महत्वाकांक्षी और अत्याधुनिक ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट परियोजनाओं में शीर्ष स्थान पर गिना जा रहा है। इसे न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि पूरे उत्तर भारत के प्रमुख और सबसे बड़े एविएशन हब (Aviation Hub) के रूप में बेहद आधुनिक तकनीकों के साथ विकसित किया जा रहा है। ऐसे में आरआरटीएस (RRTS) और हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन जैसी कनेक्टिविटी परियोजनाएं इस मेगा एयरपोर्ट की सफलता में सबसे मजबूत मील का पत्थर साबित होंगी, जिससे दिल्ली-एनसीआर का वैश्विक स्तर पर दबदबा और मजबूत होगा।