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NEET UG Paper Leak 2026: अब सीबीआई के रडार पर आए पेपर खरीदने वाले अमीर अभिभावक, महाराष्ट्र में कई ठिकानों पर छापेमारी

नई दिल्ली/नांदेड़: देशभर में इन दिनों नीट यूजी (NEET-UG) 2026 पेपर लीक मामला राष्ट्रीय सुर्खियों में बना हुआ है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) लगातार इस बड़े रैकेट की कड़ियों को जोड़ने के लिए व्यापक जांच कर रही है। महाराष्ट्र से लेकर राजस्थान तक इस मामले में अब तक कई लोगों की गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, वहीं अब जांच की दिशा और भी ज्यादा आक्रामक हो गई है। अब तक केवल पेपर सॉल्वर, बिचौलियों और कथित मास्टरमाइंड तक सीमित रही जांच में सीबीआई ने अब उन अभिभावकों (माता-पिता) को भी अपने रडार पर ले लिया है, जिन पर अपने बच्चों के लिए लीक पेपर खरीदने का सीधा आरोप है। जांच एजेंसी को पुख्ता शक है कि कुछ संपन्न और रसूखदार परिवारों ने अपने बच्चों को मेडिकल कॉलेज में दाखिला दिलाने के लिए बिचौलियों को लाखों रुपए खर्च कर पेपर हासिल किए थे।

💰 5 लाख से 10 लाख रुपये तक बिचौलियों को देने का संदेह: कारोबारी के घर से मोबाइल, लैपटॉप और कॉल रिकॉर्ड्स सीज

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, सीबीआई की आठ सदस्यीय विशेष टीम ने शनिवार और रविवार को महाराष्ट्र के नांदेड़ और लातूर में कई संदिग्ध ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। नांदेड़ के विद्युत नगर इलाके में एक नामचीन कारोबारी के घर समेत तीन से चार परिसरों की सघन तलाशी ली गई। जांच एजेंसी को खुफिया इनपुट मिला था कि एक परिवार ने अपनी बेटी के लिए परीक्षा से पहले ही लीक पेपर खरीदे थे। अधिकारियों को संदेह है कि इस मामले में परिवार ने ₹5 लाख से ₹10 लाख तक की मोटी रकम बिचौलियों को ट्रांसफर की थी। जांच के दौरान सीबीआई की टीम ने लड़की के माता-पिता से करीब आठ घंटे तक आमने-सामने बिठाकर पूछताछ की। इसके साथ ही सीबीआई ने उनके मोबाइल फोन, लैपटॉप, दस्तावेज, कॉल रिकॉर्ड और व्हाट्सएप मैसेज सहित कई महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक सबूतों को अपने कब्जे में ले लिया है।

🏢 जांच के घेरे में आया निजी कोचिंग संस्थान AIB: रिजल्ट से पहले ही ‘The Results To Come’ टैगलाइन से लगाए थे पोस्टर

इस जांच की आंच में अब महाराष्ट्र के कई नामी कोचिंग सेंटर भी आते दिख रहे हैं। नांदेड़ मामले में छात्रा के पिता जो एक बड़े कारोबारी हैं, उन्होंने कथित तौर पर लीक पेपर खरीदने के लिए करीब 10 लाख रुपये खर्च किए थे, जिसमें से 5 लाख एक बिचौलिए को और 5 लाख दूसरे व्यक्ति को दिए गए थे। जांच एजेंसी अब यह भी पता लगा रही है कि छात्रा का पुणे के एक कोचिंग संस्थान से क्या संबंध था, जहां वह परीक्षा की तैयारी के बहाने करीब 15 दिनों तक रुकी थी। इसी बीच, निजी कोचिंग संस्थान ‘AIB’ का नाम भी जांच में प्रमुखता से सामने आया है। इस संस्थान ने नीट का आधिकारिक परीक्षा परिणाम आने से पहले ही ‘The Results To Come’ टैगलाइन के साथ संभावित टॉप छात्रों के बड़े-बड़े पोस्टर सार्वजनिक रूप से लगा दिए थे, जिनमें संबंधित संदेहास्पद छात्रा की तस्वीर भी शामिल थी। इससे जांच एजेंसियों का संदेह और गहरा गया है। हालांकि, AIB के संचालक अतुल मोरे ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि छात्रा उनके यहां पढ़ती जरूर थी और मॉक टेस्ट में 400 से 450 अंक तक लाती थी, लेकिन पिछले 15 दिनों से वह संस्थान से जुड़ी नहीं थी।

🕸️ पुणे, लातूर और नांदेड़ समेत कई शहरों तक फैला है संगठित नेटवर्क: खर्च निकालने के लिए अन्य लोगों को भी बेचा पेपर

सीबीआई अधिकारियों ने बताया कि रविवार की सुबह नांदेड़ में एक अन्य अभिभावक के आवास पर भी तलाशी ली गई, जिसके तुरंत बाद साक्ष्य जुटाकर सीबीआई की एक अन्य टीम लातूर की ओर रवाना हुई। सीबीआई को शक है कि यह पूरा रैकेट पुणे, लातूर, नांदेड़ और आसपास के सीमावर्ती जिलों में फैले एक बेहद संगठित आपराधिक नेटवर्क के जरिए चलाया जा रहा था। जांचकर्ताओं का मानना है कि कुछ शातिर अभिभावकों ने भारी रकम देकर पेपर हासिल करने के बाद उसे अन्य परिचित लोगों तक भी आगे फॉरवर्ड किया, ताकि खुद द्वारा खर्च की गई रकम का कुछ हिस्सा वापस वसूला जा सके। सूत्रों के अनुसार, कई हाई-प्रोफाइल मामलों में अभिभावकों ने ₹10 लाख से लेकर ₹25 लाख तक की भारी-भरकम रकम चुकाई है। एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि किन-किन छात्रों ने जानबूझकर इस लीक पेपर का नाजायज फायदा उठाया है।

🔍 मनी ट्रेल और लाभार्थियों की पहचान पर फोकस: शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी पर उठे गंभीर सवाल

सीबीआई इस बहुचर्चित मामले में पहले ही कई मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, जिनमें कथित मास्टरमाइंड, पेपर सॉल्वर और बिचौलिए शामिल हैं। अब जांच का मुख्य फोकस ‘मनी ट्रेल’ यानी पैसों के अवैध लेन-देन के स्रोतों और उन अंतिम लाभार्थियों (Beneficiaries) की पहचान पर है, जिन्होंने कथित तौर पर इस अवैध नेटवर्क का फायदा उठाकर मेधावी छात्रों के हक पर डाका डाला है। वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में महाराष्ट्र और अन्य राज्यों में और भी बड़ी छापेमारी हो सकती है। बहरहाल, नीट (NEET) जैसी देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा में पेपर लीक के इन गंभीर और संस्थागत आरोपों ने देश की समूची शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे लाखों मेहनती छात्रों और उनके परिवारों के बीच गहरा असंतोष है।