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डीआरडीओ अब अग्नि छह के लिए तैयार

केंद्र सरकार से औपचारिक अनुमति मिलने का है इंतजार

  • यह अधिक उन्नत श्रेणी का हथियार है

  • आईसीबीएम श्रेणी का मिसाइल होगा

  • भारत के पास हर किस्म के हथियार

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के अध्यक्ष समीर वी. कामत ने गुरुवार को कहा कि अग्नि-छह बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पूरी तरह से सरकार के निर्णय पर निर्भर है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जैसे ही सरकार से हरी झंडी मिलेगी, एजेंसी इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए पूरी तरह तैयार है।एएनआई नेशनल सिक्योरिटी समिट 2.0 में बोलते हुए कामत ने कहा, यह सरकार का फैसला है। जब भी सरकार हमें अनुमति देगी, हम तैयार हैं। अग्नि-6 एक उन्नत अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल होने की उम्मीद है, जिसकी मारक क्षमता और तकनीक भारत की मौजूदा अग्नि श्रृंखला की मिसाइलों से कहीं अधिक शक्तिशाली होगी।

हाइपरसोनिक मिसाइल कार्यक्रम में बड़ी प्रगति समिट के दौरान कामत ने भारत के एलआर एएसएचएम हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल कार्यक्रम पर भी महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने बताया कि यह कार्यक्रम अब उन्नत चरण में है और जल्द ही इसके शुरुआती परीक्षण होने की संभावना है। कामत के अनुसार, भारत दो तरह की प्रणालियों पर काम कर रहा है:

हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल में बूस्टर का उपयोग शुरुआती गति देने के लिए किया जाता है और फिर यह बिना किसी अतिरिक्त ऊर्जा के ग्लाइड (तैरते हुए) करती है। इसका विकास अधिक उन्नत चरण में है। हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल में स्कैमजेट इंजन लगा होता है जो पूरी उड़ान के दौरान इसे शक्ति प्रदान करता है। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह के बयान का हवाला देते हुए कामत ने प्रस्तावित मिसाइल बल की संरचना पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि एक प्रभावी बल के लिए विभिन्न श्रेणियों की मिसाइलों का मिश्रण आवश्यक है। इसमें 2,000 किलोमीटर तक की कम और मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों के साथ-साथ क्रूज और हाइपरसोनिक मिसाइलें भी शामिल होनी चाहिए।

वर्तमान तैयारी पर उन्होंने बताया कि कम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल प्रलय परीक्षण के अंतिम चरण में है और जल्द ही सेना में शामिल होने के लिए तैयार होगी। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि कुछ मौजूदा रणनीतिक मिसाइलों को मध्यम और लंबी दूरी के सामरिक  उपयोग के लिए परिवर्तित किया जा सकता है।