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कार्ति चिदंबरम मामले से अलग हुई स्वर्ण कांता शर्मा

केजरीवाल का धक्का अब हाईकोर्ट में असर दिखाने लगा

  • सीबीआई ने दर्ज किया है यह केस

  • प्राथमिकी को रद्द करन की मांग है

  • अवैध धनशोधन का आरोप लगा है

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने मंगलवार को कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम द्वारा दायर उस याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया, जिसमें उन्होंने केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो द्वारा उनके खिलाफ दर्ज भ्रष्टाचार की प्राथमिकी को रद्द करने की मांग की थी। यह मामला एक बहुराष्ट्रीय शराब कंपनी, डियाजियो स्कॉटलैंड को कथित तौर पर अवैध रूप से राहत देने से जुड़ा है।

सीबीआई द्वारा दर्ज इस भ्रष्टाचार के मामले में आरोप लगाया गया है कि कार्ति चिदंबरम ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए डियाजियो स्कॉटलैंड को शुल्क मुक्त व्हिस्की की बिक्री पर लगे प्रतिबंध से राहत दिलाने में मदद की थी। जांच एजेंसी का दावा है कि इस प्रक्रिया में नियमों का उल्लंघन किया गया और भ्रष्टाचार के माध्यम से निजी कंपनी को अनुचित लाभ पहुँचाया गया। कार्ति चिदंबरम ने इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था और इस एफआईआर को पूरी तरह रद्द करने की प्रार्थना की थी।

न्यायमूर्ति का निर्णय: मंगलवार को जब यह मामला सुनवाई के लिए न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ के समक्ष आया, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि वे इस मामले की सुनवाई नहीं करेंगी। हालांकि, न्यायाधीशों द्वारा सुनवाई से हटने के पीछे अक्सर व्यक्तिगत या पेशेवर कारण होते हैं ताकि न्याय की निष्पक्षता बनी रहे, लेकिन इस विशिष्ट मामले में उन्होंने विस्तृत कारणों का उल्लेख किए बिना स्वयं को अलग करने का निर्णय लिया। अब इस याचिका को नियमों के अनुसार मुख्य न्यायाधीश के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा, ताकि इसे किसी अन्य पीठ को आवंटित किया जा सके।

बहिष्कार और विवादों का संदर्भ: न्यायमूर्ति शर्मा का यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब हाल ही में आम आदमी पार्टी के नेताओं, अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया ने आबकारी नीति मामले में उनके समक्ष कार्यवाही का बहिष्कार करने की घोषणा की है। उन नेताओं ने न्यायमूर्ति की निष्पक्षता पर सवाल उठाए थे, जिसे न्यायमूर्ति शर्मा ने पहले ही खारिज कर दिया था। कार्ति चिदंबरम के मामले में उनका हटना कानूनी हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। अब यह देखना होगा कि उच्च न्यायालय की कौन सी नई पीठ इस संवेदनशील भ्रष्टाचार मामले की सुनवाई करेगी।