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निएंडरथल दूसरों को मारकर नरभक्षण करते थे

मानव जीवन के क्रमिक विकास का रोंगटे खड़े करने वाला खुलासा

  • उत्तर मध्य पुरापाषाण काल की हिंसा

  • हड्डियों के अवशेषों की गहन जांच हुई

  • आधुनिक मानव के विकास से पूर्व काल

राष्ट्रीय खबर

रांचीः बेल्जियम की एक गुफा से प्राप्त निएंडरथल अवशेषों पर किए गए एक नए अध्ययन ने प्रागैतिहासिक जीवन के एक परेशान करने वाले और भयावह पहलू पर रोशनी डाली है। शोधकर्ताओं ने बेल्जियम की ट्रोइसिएम कैवर्न ऑफ गोयेट से मिली मानव हड्डियों का विश्लेषण किया, जिससे यह प्रमाण मिला है कि लगभग 41,000 से 45,000 साल पहले निएंडरथल चयनात्मक नरभक्षण में संलिप्त थे। अध्ययन के अनुसार, इन घटनाओं में मुख्य रूप से वयस्क महिलाएं और बच्चे शिकार बने थे।

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वैज्ञानिकों ने पहली बार इस स्थल पर पाए गए व्यक्तियों की जैविक रूपरेखा तैयार करने में सफलता प्राप्त की है। निष्कर्ष बताते हैं कि ये लोग उस क्षेत्र में रहने वाले स्थानीय निएंडरथल समूह का हिस्सा नहीं थे। इसके बजाय, वे संभवतः कहीं और से आए थे या उन्हें पकड़कर इस गुफा में लाया गया था। हड्डियों की स्थिति इस बात का पुख्ता सुराग देती है कि वहां क्या घटित हुआ होगा।

कई हड्डियों पर काटने, तोड़ने और संसाधित करने के निशान मिले हैं, जो ठीक वैसे ही हैं जैसे शिकार किए गए जानवरों को भोजन के लिए तैयार करते समय बनाए जाते हैं। विशेष रूप से, शरीर के निचले अंगों को चुना गया था और पोषक तत्वों से भरपूर मज्जा निकालने के लिए हड्डियों को जानबूझकर तोड़ा गया था।

यह पैटर्न स्पष्ट रूप से इंगित करता है कि इन शरीरों के साथ कोई औपचारिक या धार्मिक संस्कार नहीं किया गया था। साक्ष्य भोजन के लिए किए गए नरभक्षण की ओर इशारा करते हैं। जानवरों के शिकार के लिए उपयोग की जाने वाली तकनीकों का ही इन मानव पीड़ितों पर प्रयोग किया गया, जिससे पता चलता है कि उन्हें पोषण के स्रोत के रूप में देखा गया था।

यह अध्ययन उत्तर मध्य पुरापाषाण काल से संबंधित है, जब उत्तरी यूरोप में निएंडरथल समूहों का बोलबाला था और आधुनिक मानव (होमो सेपियन्स) का आगमन शुरू हो रहा था। इस संदर्भ में, बाहरी लोगों को लक्षित करना विशेष रूप से चौंकाने वाला है। शोधकर्ताओं का प्रस्ताव है कि यह व्यवहार निएंडरथल समुदायों के बीच क्षेत्रीय तनाव, संसाधनों की प्रतिस्पर्धा या संघर्ष का परिणाम हो सकता है।

एक दशक से अधिक समय तक चले इस शोध में डीएनए विश्लेषण, रेडियोकार्बन डेटिंग और आइसोटोपिक माप जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया गया। इन तरीकों से वैज्ञानिकों को पीड़ितों की उत्पत्ति और उनकी मृत्यु के पीछे की घटनाओं को समझने में मदद मिली, जो मानव इतिहास के एक महत्वपूर्ण कालखंड में निएंडरथल व्यवहार की एक स्पष्ट और विस्तृत तस्वीर पेश करती है। यह अध्ययन दर्शाता है कि निएंडरथल जीवन सामाजिक गतिशीलता और अस्तित्व के दबावों के कारण काफी जटिल और कभी-कभी अत्यंत क्रूर भी था।

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