चीन से ईरान को हथियारों की आपूर्ति
एजेंसियां
वाशिंगटन: अमेरिकी खुफिया एजेंसियों से प्राप्त नए संकेतों के अनुसार, चीन अगले कुछ हफ्तों के भीतर ईरान को आधुनिक वायु रक्षा प्रणालियों की एक नई खेप सौंपने की तैयारी कर रहा है। इस मामले से परिचित तीन सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट दी कि खुफिया आकलन इस ओर इशारा कर रहे हैं कि बीजिंग और तेहरान के बीच सैन्य सहयोग एक नए और संवेदनशील स्तर पर पहुँच गया है।
रिपोर्ट में विशेष रूप से उल्लेख किया गया है कि बीजिंग इन हथियारों की खेप को तीसरे देशों के माध्यम से भेजने की रणनीति पर काम कर रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य हथियारों के मूल स्रोत को छिपाना है, ताकि अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और सीधे राजनयिक विरोध से बचा जा सके। सूत्रों के अनुसार, चीन मुख्य रूप से कंधे पर रखकर दागी जाने वाली विमान भेदी मिसाइल प्रणालियाँ, जिन्हें मॅन-पोर्टेबल एयर डिफेंस सिस्टम कहा जाता है, ईरान को हस्तांतरित करने की योजना बना रहा है। ये हथियार कम ऊंचाई पर उड़ने वाले विमानों और ड्रोनों के लिए बेहद घातक माने जाते हैं।
शनिवार दोपहर मियामी के लिए व्हाइट हाउस से प्रस्थान करते समय अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस मुद्दे पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। संवाददाताओं के एक समूह से बात करते हुए उन्होंने सीधे तौर पर चीन को चेतावनी दी। ट्रम्प ने कहा, अगर चीन ऐसा करता है, तो उसे बड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, उन्होंने उन समस्याओं की प्रकृति या अमेरिका की संभावित जवाबी कार्रवाई के बारे में विस्तार से कोई जानकारी नहीं दी। उनके इस संक्षिप्त लेकिन कड़े बयान ने बीजिंग और वाशिंगटन के बीच पहले से जारी तनाव को और बढ़ा दिया है।
इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद अमेरिकी विदेश विभाग, वाशिंगटन स्थित चीनी दूतावास और चीन के विदेश मंत्रालय ने रॉयटर्स द्वारा की गई टिप्पणी की मांग पर फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। यह कूटनीतिक चुप्पी ऐसे समय में देखी जा रही है जब वैश्विक भू-राजनीति एक नाजुक मोड़ पर है।
दिलचस्प बात यह है कि हथियारों की आपूर्ति की यह खबर उसी दिन आई जब अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधि पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में उच्च स्तरीय वार्ता कर रहे हैं। पिछले छह हफ्तों से जारी भीषण युद्ध को समाप्त करने के उद्देश्य से शुरू हुई इस शांति वार्ता के बीच चीन का सैन्य हस्तक्षेप समीकरणों को बदल सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईरान को चीनी तकनीक प्राप्त होती है, तो युद्ध क्षेत्र में उसकी स्थिति मजबूत होगी, जो अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए चिंता का विषय है। यह घटनाक्रम न केवल मध्य-पूर्व की सुरक्षा बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन को भी प्रभावित करने की क्षमता रखता है।