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आयोग ने एग्जिट पोल पर लगाया प्रतिबंध

दूसरे राज्यों में चुनावी लहर को रोकने की नई कोशिश

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः भारत निर्वाचन आयोग ने अप्रैल 2026 में होने वाले पाँच राज्यों के विधानसभा चुनावों को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने 9 अप्रैल की सुबह 7:00 बजे से लेकर 29 अप्रैल की शाम 6:30 बजे तक किसी भी प्रकार के एग्जिट पोल के आयोजन और उनके परिणामों के प्रसारण या प्रकाशन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। यह निर्णय चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित करने और मतदाताओं को प्रभावित होने से बचाने के लिए लिया गया है।

निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि इस अवधि के दौरान एग्जिट पोल आयोजित करना या उन्हें सार्वजनिक करना लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 126A का उल्लंघन माना जाएगा। दंड: इस नियम का उल्लंघन करने वाले व्यक्ति या संस्था को दो साल तक के कारावास, जुर्माना या दोनों से दंडित किया जा सकता है। यह प्रतिबंध इसलिए लगाया जाता है ताकि पहले चरणों में मतदान कर चुके मतदाताओं के रुझान का असर बाद के चरणों में मतदान करने वाले लोगों के निर्णय पर न पड़े।

इस महीने कुल 824 विधानसभा सीटों के लिए मतदान हो रहा है। जिनमें से तीन राज्यों में मतदान संपन्न हो चुका है और औसत से अधिक मतदान की वजह से राजनीतिक दल के साथ साथ आयोग का भी मन डोल रहा है। चुनाव आयोग ने साइलेंस पीरियड (मौन अवधि) के नियमों को भी कड़ाई से लागू करने के निर्देश दिए हैं। मतदान समाप्त होने के समय से 48 घंटे पहले चुनाव प्रचार थम जाता है।

आयोग ने स्वीकार किया है कि सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के दौर में इस 48 घंटे की मौन अवधि को पूरी तरह से लागू करना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। निर्वाचन आयोग ने यह भी साफ किया है कि सुरक्षा कारणों और भौगोलिक स्थितियों को देखते हुए मतदान के समय में स्थानीय स्तर पर बदलाव किए जा सकते हैं, लेकिन आमतौर पर मतदान सुबह 7:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक चलेगा। मतदाताओं से अपील की गई है कि वे बिना किसी डर या प्रभाव के अपने मताधिकार का प्रयोग करें।