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महिला आरक्षण के लिए विधेयक के मसौदे को मंजूरी

मोदी सरकार अपने ही फैसले पर आगे बढ़ने की तैयारी में

  • पूर्व जनगणना को भी आधार बनाया है

  • 273 सीटें महिलाओँ के लिए आरक्षित

  • अगले चुनाव से पूर्व लागू करना है

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्लीः केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण संशोधन विधेयक के मसौदे को अपनी स्वीकृति दे दी, जिसका उद्देश्य 2029 के लोकसभा चुनावों तक महिला आरक्षण अधिनियम को पूरी तरह से लागू करना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यह बड़ा निर्णय लिया गया।

यह संशोधन 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम (106वां संविधान संशोधन अधिनियम) के कार्यान्वयन ढांचे में बदलाव करने का प्रयास करता है। सरकार का यह कदम देश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी को कानूनी रूप से सुनिश्चित करने की दिशा में एक निर्णायक मोड़ माना जा रहा है।

प्रस्ताव के अनुसार, नए परिसीमन के बाद लोकसभा की कुल सदस्य संख्या 543 से बढ़कर 816 होने की संभावना है। इस विस्तारित सदन में कुल सीटों का लगभग एक-तिहाई, यानी 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। यह कोटा वर्टिकल (लंबवत) रूप से लागू किया जाएगा, जिसका अर्थ है कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति श्रेणियों के भीतर भी महिलाओं के लिए आरक्षण का प्रावधान होगा।

मौजूदा कानून से एक महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए, सरकार ने परिसीमन के लिए 2027 के जनगणना आंकड़ों का इंतजार करने के बजाय 2011 की जनगणना को आधार बनाने की योजना बनाई है। सूत्रों के मुताबिक, यह निर्णय इसलिए लिया गया है ताकि महिला आरक्षण के रोलआउट में तेजी लाई जा सके और इसे अगले आम चुनावों (2029) से पहले निश्चित रूप से लागू किया जा सके।

संशोधन विधेयक को आगामी 16 से 18 अप्रैल के बीच बजट सत्र की विस्तारित बैठकों के दौरान बहस के लिए सदन के पटल पर रखा जाएगा। यदि यह पारित हो जाता है, तो यह भारतीय संसदीय इतिहास के सबसे बड़े सुधारों में से एक होगा, जो न केवल सीटों की संख्या बढ़ाएगा बल्कि संसद के स्वरूप को भी अधिक समावेशी बनाएगा।