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ममता की अपनी ही सीट पर चुनाव आयोग ने किया खेला

पच्चीस फीसदी वोटरों के नाम काट दिये गये

  • मतदाता सूची में कटौती के प्रमुख आंकड़े

  • तेइस प्रतिशत से ज्यादा मुस्लिम नाम है

  • चुनाव आयोग का स्पष्टीकरण भी आया है

राष्ट्रीय खबर

कोलकाताः पश्चिम बंगाल की सबसे हाई-प्रोफाइल विधानसभा सीटों में से एक, भवानीपुर, इन दिनों एक चौंकाने वाले घटनाक्रम के कारण चर्चा में है। चुनावी रोल के विशेष निरीक्षण के बाद इस निर्वाचन क्षेत्र के मतदाताओं की संख्या में लगभग 25 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है। यह वही निर्वाचन क्षेत्र है जहाँ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और भाजपा के शुभेंदु अधिकारी के बीच कड़ा मुकाबला देखा जाता रहा है।

निर्वाचन आयोग द्वारा की गई इस प्रक्रिया के तहत कुल 51,004 नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं। इन विलोपन का सामाजिक विश्लेषण करने पर सामने आया है कि हटाए गए कुल नामों में से 23.3 प्रतिशत मुस्लिम समुदाय से हैं, जबकि 76.7 फीसद गैर-मुस्लिम मतदाता हैं।

एसआईआर प्रक्रिया शुरू होने से पहले, भवानीपुर क्षेत्र में कुल 2,06,295 पंजीकृत मतदाता थे। संशोधनों के पहले चरण में ही 44,787 नाम हटा दिए गए। इन्हें हटाने के पीछे मुख्य कारण अनुपस्थिति, स्थानांतरण, मृत्यु, डुप्लिकेट प्रविष्टियाँ या अनमैप्ड डेटा बताया गया है। इसके बाद दूसरे दौर की प्रक्रिया में 2,342 और नाम हटाए गए, जबकि मात्र 18 नए मतदाताओं को सूची में जोड़ा गया। एक आधिकारिक स्रोत के अनुसार, लगभग 14,154 मतदाताओं को न्यायनिर्णयन की श्रेणी में रखा गया था, यानी उनकी पात्रता की गहन जांच की जानी थी।

साबर संस्थान के शोधकर्ताओं ने 15 पूरक सूचियों का विस्तृत विश्लेषण किया है। उनके शोध के अनुसार, शुरुआत में जिन 14,154 मतदाताओं को जांच के दायरे में रखा गया था, उनमें से 10,238 मतदाताओं को बाद में बहाल कर दिया गया, जबकि शेष 3,875 नामों को अंतिम रूप से हटा दिया गया। शोधकर्ताओं ने एक महत्वपूर्ण बिंदु की ओर इशारा करते हुए कहा कि पूरक सूचियों के माध्यम से हटाए गए लोगों में लगभग 40 प्रतिशत मुस्लिम थे।

चुनाव आयोग के सूत्रों ने पुष्टि की है कि अंतिम जांच प्रक्रिया के दौरान लगभग 3,500 नाम हटाए गए। एक अधिकारी ने बताया कि कुल 14,000 मामलों को बारीकी से जांचने के लिए चिन्हित किया गया था। संस्थान के आंकड़ों से यह भी पता चला है कि जांच के दायरे में आने वाले गैर-मुस्लिमों की संख्या 43 प्रतिशत थी। हालांकि, अंतिम मतदाता सूची से हटाए जाने वाले कुल मुस्लिम मतदाताओं का प्रतिशत 7.7 फीसद रहा, जबकि गैर-मुस्लिमों के मामले में यह आंकड़ा 92 फीसद तक पहुंच गया।

इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं का नाम कटना आगामी चुनावों के समीकरणों को पूरी तरह बदल सकता है। राजनीतिक विश्लेषक इसे सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के लिए एक बड़ी चुनौती के रूप में देख रहे हैं, क्योंकि भवानीपुर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या में एक चौथाई की कमी किसी भी दल के जीत-हार के अंतर को प्रभावित कर सकती है।