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संघर्ष विराम की घोषणा और अनिश्चित शांति

खाड़ी क्षेत्र में फिलवक्त हमला रोके जाने का एलान

  • इजरायल की ओर से इसकी पुष्टि नहीं

  • एलान के बाद भी कई स्थानों पर हमले

  • हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान की  निगरानी

एजेंसियां

वाशिंगटनः राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ दो सप्ताह के संघर्ष विराम की ऐतिहासिक घोषणा के बाद, मध्य-पूर्व में शांति और संघर्ष की एक मिली-जुली तस्वीर उभर रही है। पाकिस्तान के कूटनीतिक प्रस्ताव पर आधारित इस समझौते का मुख्य उद्देश्य सैन्य कार्रवाई को रोककर बातचीत का रास्ता साफ करना है। हालांकि, घोषणा के कुछ ही समय बाद खाड़ी क्षेत्र और इज़राइल में मिसाइल हमलों की खबरों ने इस शांति की स्थिरता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जहाँ एक ओर अमेरिकी सेना ने अपनी कार्रवाई रोक दी है, वहीं इज़राइली सेना ने स्पष्ट किया है कि उसके हमले अभी भी जारी हैं। यह स्थिति दर्शाती है कि क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताओं के कारण इस संघर्ष विराम का पूर्ण कार्यान्वयन एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। दूसरी ओर, ईरान के सर्वोच्च नेता ने भी अपनी सभी सैन्य इकाइयों को गोलाबारी बंद करने के कड़े निर्देश दिए हैं। ईरानी पक्ष की ओर से यह बयान भी आया है कि यह युद्ध का अंत नहीं है, लेकिन सर्वोच्च नेता के आदेश का पालन करना अनिवार्य है।

इस समझौते की एक प्रमुख शर्त हॉर्मुज जलडमरूमध्य को अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए फिर से खोलना था। ईरान के विदेश मंत्री के अनुसार, संघर्ष विराम के दौरान ईरानी सेना इस रणनीतिक जलमार्ग से जहाजों के सुरक्षित आवागमन का समन्वय करेगी। यह कदम वैश्विक ऊर्जा बाजार और तेल की आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि हॉर्मुज जलमार्ग वैश्विक अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा है।

अब सबकी निगाहें पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पर टिकी हैं, जहाँ शुक्रवार को ईरान और अमेरिका के प्रतिनिधिमंडल वार्ता के लिए जुटने वाले हैं। पाकिस्तान की इस पहल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहा जा रहा है, जिसने कूटनीति के लिए यह दो सप्ताह की खिड़की प्रदान की है। हालांकि, अमेरिकी घरेलू राजनीति में सीनेटर लिंडसे ग्राहम जैसे नेताओं ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी स्थायी शांति प्रस्ताव के लिए अमेरिकी कांग्रेस की मंजूरी अनिवार्य होगी।

संक्षेप में, यह संघर्ष विराम एक नाजुक मोड़ पर है। जहाँ एक तरफ कूटनीतिक प्रयास और व्यापारिक मार्ग खुलने की उम्मीद है, वहीं दूसरी तरफ इज़राइली हमले और युद्ध अभी समाप्त नहीं हुआ वाली मानसिकता इस शांति प्रक्रिया को भंग करने की क्षमता रखती है। अगले 14 दिन यह तय करेंगे कि यह केवल एक सैन्य विराम है या मध्य-पूर्व में एक नए अध्याय की शुरुआत।