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Korea Health News: कोरिया में स्वास्थ्य सेवाएं वेंटिलेटर पर! शिवपुर चरचा में धूल फांक रही एंबुलेंस, मरीज बेहाल

कोरिया: नगर पालिका परिषद शिवपुर-चरचा में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है. विधायक निधि से जनता की सुविधा के लिए उपलब्ध कराई गई एंबुलेंस प्रशासनिक लापरवाही के चलते सालों से खराब होकर खड़ी है. लगभग 35 से 40 हजार की आबादी वाले इस नगर में आपातकालीन चिकित्सा सुविधा का यह महत्वपूर्ण साधन आज पूरी तरह ठप पड़ा है.

कोरिया में स्वास्थ्य सेवाओं का बुरा हाल

शिकायत है कि बंद पड़ी एंबुलेंस लंबे समय तक बिना पंजीयन के ही संचालित होती रही, जो नियमों के खिलाफ है. वर्तमान में पंजीयन के अभाव में इसे पूरी तरह बंद कर दिया गया है, जिससे क्षेत्र के गरीब और जरूरतमंद मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. मरीजों को जिला अस्पताल या अन्य स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचने के लिए निजी वाहनों पर निर्भर रहना पड़ रहा है, जिसका खर्च हर किसी के बस की बात नहीं है. पूर्व पार्षद रामाधार टोप्पो ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि बिना रजिस्ट्रेशन के एंबुलेंस का संचालन कानून के साथ सीधा खिलवाड़ है.

डिलीवरी का केस है. एंबुलेंस नहीं आता है. जब भी किसी को अस्पताल ले जाना होता है तब हम निजी गाड़ी बुक कर ले जाते हैं: पार्वती, ग्रामीण महिला

एंबुलेस को मरीजों को लाने और ले जाने के लिए दी गई. लेकिन गाड़ी का रजिस्ट्रेशन नहीं कराया गया: रामाधार टोप्पो, पूर्व पार्षद

अंबिका सिंह देव जी ने ये गाड़ी मुहैया कराई थी. लेकिन नगर पालिका की उदासीनता के चलते इसका लाभ गरीबों को नहीं मिल पा रहा: प्रदीप गुप्ता, जिला अध्यक्ष, जिला कांग्रेस कमेटी कोरिया

गाड़ी के पूरे दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं. दस्तावेज मिलने के बाद गाड़ी को दोबारा शुरू किया जाएगा: वी.के. ओझा, मुख्य नगरपालिका अधिकारी

कांग्रेस की सरकार में मिला था एंबुलेंस

जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष प्रदीप गुप्ता ने कहा कि पूर्व विधायक अंबिका सिंहदेव द्वारा जनता की सुविधा के लिए यह एंबुलेंस उपलब्ध कराई गई थी, लेकिन नगर पालिका की उदासीनता ने इसे कबाड़ में तब्दील कर दिया. उन्होंने यह भी बताया कि एंबुलेंस के पंजीयन के लिए आरटीओ में केवल एक साधारण आवेदन देना होता है और इसमें किसी प्रकार का टैक्स भी नहीं लगता, फिर भी अब तक प्रक्रिया पूरी नहीं होना गंभीर लापरवाही है.

गाड़ी के दस्तावेज नहीं होने की बात आई सामने

मुख्य नगरपालिका अधिकारी वी.के. ओझा का बयान इस मामले में और भी चौंकाने वाला है. उन्होंने कहा कि एंबुलेंस पिछले शासनकाल में खरीदी गई थी, लेकिन उससे संबंधित दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं और उन्हें इसकी पूरी जानकारी भी नहीं है. उन्होंने बताया कि फिलहाल वाहन खड़ा है और आवश्यक कागजात मिलने के बाद ही इसे चालू किया जाएगा. इस पूरे मामले ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. जब जिम्मेदार अधिकारी ही आवश्यक जानकारी से अंजान हैं तो आम जनता की समस्याओं का समाधान कैसे होगा?