भिलाई में छात्रा का आत्मघाती कदम: सुसाइड नोट में लिखा- ‘मम्मी-पापा मुझे माफ करना’, स्मृति नगर में भी छात्र ने दी जान
दुर्ग: ईश्वर ने जिंदगी जीने के लिए और दूसरों की मदद के लिए दी है. जीवन में कई तरह के उतार-चढ़ाव आते हैं, ऐसे पल में हमें मन को मजबूत बनाना चाहिए. जिंदगी में हारने के बजाए जीतने का तरीका हम सभी को सीखना चाहिए. जिंदगी से हारना और जान देना किसी समस्या का समाधान नहीं है. ऐसा करने वाले लोग जिंदगी और संघर्ष से भागते हैं. शनिवार को भिलाई में जिंदगी के संघर्षों से निराश होकर दो छात्रों ने जान दे दी.
2 अलग-अलग घटनाओं में 2 छात्रों ने दी जान
छात्रों के द्वारा जान देने की दोनों ही घटनाएं शहर के स्मृति नगर इलाके में हुई. पहली घटना में 19 साल के छात्र उमेश साहू ने जान दे दी. दूसरी घटना भी स्मृति नगर की ही है, जहां 11वीं में पढ़ने वाली छात्रा ने मामा के घर जान दे दी. पुलिस ने दोनों ही मामलों में शिकायत दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. बच्चों के द्वारा इस तरह का घातक कदम उठाए जाने के बाद दोनों छात्रों के परिवार सदमे में हैं.
छात्र बीएसीए का स्टूडेंट था और छात्रा 11वीं की पढ़ाई कर रही थी
पुलिस ने बताया कि छात्र उमेश साहू बीसीए सेकेंड ईयर का छात्र था. उमेश के पिता ऑटो चलाकर परिवार का पालन पोषण करते हैं. सुबह जब उमेश के कमरे का दरवाजा काफी देर तक नहीं खुला, तो परिवार वालों को चिंता हुई. परिजनों ने बाहर से कमरे में झांककर देखा तो पाया कि उनका बेटा उमेश बेसुध पड़ा है. मौके से मिले दस्तावेज और मोबाइल फोन को पुलिस ने जब्त कर लिया है.
मौके से मिला छात्रा का लिखा खत
वहीं दूसरी घटना में 11वीं की छात्रा जो अपनी मां की मौत के बाद अपने मामा के घर रहकर पढ़ाई कर रही थी, उसने जान दे दी. मृतक छात्रा की मां की मौत काफी पहले हो चुकी थी. पिता ने दूसरी शादी की थी. छात्रा पढ़ाई करने के लिए अपने मामा-मामी के पास रहती थी. परिजनों के मुताबिक सुबह तीन बजे जब परिवार के लोग उठे तो देखा कि छात्रा के कमरा भीतर से बंद पड़ा है. आवाज देने पर भी कोई जवाब नहीं मिल रहा है. इसके बाद परिजनों ने पड़ोसियों की मदद से कमरे का दरवाजा तोड़ा. भीतर छात्रा का शव पड़ा मिला. परिजनों ने बताया कि कुछ दिन पहले ही छात्रा अपने पापा और मां से मिलकर मामा के घर लौटी थी. लौटने के बाद उसका व्यवहार सामान्य था.
आत्महत्या नहीं है समाधान
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