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नदिया में सवा लाख वोटरों के नाम गायब

भाजपा और टीएमसी दोनों दल हैरान, चुनाव आयोग की चुप्पी

  • अपने अपने वोटबैंक की परेशानी बढ़ी

  • स्थानीय स्तर पर कोई जबाव नहीं मिला

  • आरोप प्रत्यारोप का दौर भी चालू हो गया

राष्ट्रीय खबर

कोलकाताः चुनावी मौसम की बढ़ती तपिश के बीच विचाराधीन  मतदाता सूची ने राजनीतिक गलियारों में भारी बेचैनी पैदा कर दी है। भारत निर्वाचन आयोग द्वारा हाल ही में जारी पूरक सूची (सप्लीमेंट्री लिस्ट) के आंकड़ों ने नदिया जिले के राजनीतिक समीकरणों को हिलाकर रख दिया है। ताजा रिपोर्ट के अनुसार, जिले में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं, जिससे सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और विपक्षी भारतीय जनता पार्टी दोनों के चुनावी गणित बिगड़ते नजर आ रहे हैं। दोनों ही दलों के स्थानीय नेता जनता के सवालों का संतोषजनक उत्तर नहीं दे पा रहे हैं। चुनाव से जुड़े स्थानीय अफसरों के मुताबिक इस पर कोई जानकारी तो चुनाव आयोग ही दे सकता है।

अब तक प्रकाशित सात पूरक सूचियों के विश्लेषण से पता चलता है कि नदिया जिले में कुल 1,25,867 लोगों के नाम मतदाता सूची से काट दिए गए हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, लगभग 1.57 लाख आवेदनों में से केवल 31,096 नामों को ही स्वीकार किया गया है। शेष लगभग 1.10 लाख नाम अभी भी विचाराधीन श्रेणी में लंबित हैं। इन पर अंतिम निर्णय होना अभी बाकी है, जिसने राजनीतिक दलों की धड़कनें तेज कर दी हैं।  नाम काटे जाने का सबसे अधिक प्रभाव अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों और मतुआ समुदाय प्रभावित इलाकों में देखा जा रहा है।

तृणमूल के गढ़ चापड़ा (16,031 नाम), नकाशिपारा (12,035 नाम), पलाशिपारा और कालीगंज जैसे क्षेत्रों में बड़ी कटौती हुई है। ये इलाके पारंपरिक रूप से तृणमूल के मजबूत आधार रहे हैं। भाजपा के प्रभाव वाले क्षेत्र रणाघाट उत्तर-पश्चिम (9,983 नाम) और कृष्णगंज (8,520 नाम) जैसे क्षेत्रों में भी हजारों नाम हटाए गए हैं। पिछले चुनाव में इन क्षेत्रों का बड़ा हिस्सा भाजपा के पक्ष में गया था।

इस मुद्दे पर राज्य में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। निवर्तमान राज्य मंत्री उज्ज्वल विश्वास ने इसे केंद्र की एक बड़ी साजिश करार दिया है। उन्होंने कहा, भाजपा सरकार निर्वाचन आयोग का दुरुपयोग कर रही है। षड्यंत्र के तहत हमारे समर्थकों के नाम काटे जा रहे हैं ताकि हमें सत्ता से हटाया जा सके। लेकिन बंगाल की जनता सजग है और वह तृणमूल के साथ खड़ी रहेगी।

दूसरी ओर, भाजपा नेत्री अपर्णा नंदी ने इस प्रक्रिया का बचाव करते हुए इसे एक कानूनी प्रक्रिया बताया। उन्होंने कहा, जिनके नाम कटे हैं, वे ट्रिब्यूनल का दरवाजा खटखटा सकते हैं। हम पड़ोसी देश से आए धार्मिक रूप से प्रताड़ित लोगों के अधिकारों की रक्षा करेंगे, लेकिन घुसपैठियों के मामले में कानून अपना काम करेगा। यदि दस्तावेज सही हैं, तो डरने की कोई बात नहीं है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मतदाता सूची में यह बड़ा फेरबदल नदिया की चुनावी तस्वीर बदल सकता है। जीत का अंतर कम होने या परिणाम पूरी तरह पलटने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। अज्ञात आशंका के इस साये ने उम्मीदवारों के माथे पर चिंता की लकीरें गहरी कर दी हैं।