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आम आदमी पार्टी के फैसले के बाद राघव चड्डा का वीडियो जारी

संसद में अपने सवालों को जनहितकारी बताया

राष्ट्रीय खबर

नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी के भीतर संगठनात्मक बदलावों ने एक नई राजनीतिक चर्चा को जन्म दे दिया है। अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली पार्टी ने राज्यसभा में अपने मुखर चेहरे राघव चड्ढा को उपनेता के पद से मुक्त कर दिया है। इस फैसले के कुछ ही घंटों बाद, 37 वर्षीय सांसद राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो साझा कर अपनी पहली सार्वजनिक प्रतिक्रिया दी। हालांकि, इस वीडियो में उन्होंने अपनी पदमुक्ति या पार्टी के साथ किसी भी तनाव का सीधा जिक्र नहीं किया, बल्कि जनता से जुड़े मुद्दों पर अपना ध्यान केंद्रित रखा।

राघव चड्ढा द्वारा पोस्ट किए गए वीडियो में उनके द्वारा राज्यसभा में हाल ही में दिए गए भाषणों के अंश संकलित किए गए हैं। इसमें वे आम नागरिकों और अर्थव्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल उठाते नजर आ रहे हैं। वीडियो में मोबाइल डेटा पैक की समाप्ति के नियम, क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर काम करने वाले गिग वर्कर्स की कार्यस्थितियाँ, हवाई अड्डों पर खाद्य पदार्थों की उच्च कीमतें और बड़े शहरों में ट्रैफिक जाम जैसे मुद्दों को प्राथमिकता दी गई है। यह वीडियो ऐसे समय में आया है जब पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय को औपचारिक रूप से सूचित किया है कि चड्ढा को अब सदन में बोलने के लिए आवंटित समय न दिया जाए।

आम आदमी पार्टी ने राघव चड्ढा के स्थान पर पंजाब से राज्यसभा सदस्य और लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के चांसलर अशोक मित्तल को सदन में नया उपनेता नियुक्त किया है। संजय सिंह अभी भी सदन में पार्टी के नेता बने हुए हैं। 245 सदस्यीय राज्यसभा में आप के कुल 10 सदस्य हैं (7 पंजाब से और 3 दिल्ली से), जो इसे भाजपा, कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के बाद चौथा सबसे बड़ा समूह बनाता है। राघव चड्ढा की इस डिमौशन को केजरीवाल के भीतरी घेरे में आए बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, जिसने राजनीतिक गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है।

पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट और दिल्ली के मॉडर्न स्कूल के पूर्व छात्र राघव चड्ढा 2012 में पार्टी की स्थापना के समय से ही आप से जुड़े रहे हैं। मात्र 23 वर्ष की आयु में उन्होंने इंडिया अगेंस्ट करप्शन आंदोलन के दौरान केजरीवाल से मुलाकात की थी। वे पार्टी के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष, राजेंद्र नगर से विधायक और दिल्ली जल बोर्ड के उपाध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं। 2022 में वे राज्यसभा पहुंचे। पिछले कुछ महीनों से पार्टी की प्रमुख गतिविधियों से उनकी अनुपस्थिति और केजरीवाल व मनीष सिसोदिया को मिली क्लीन चिट पर उनकी चुप्पी ने उनके और पार्टी नेतृत्व के बीच दूरियों की चर्चाओं को हवा दी थी। हालांकि, पार्टी ने अभी तक इस बदलाव के पीछे के आधिकारिक कारणों का खुलासा नहीं किया है।