Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Bombay High Court News: ‘सरकार के खिलाफ नारे लगाना निष्कासन का आधार नहीं’, हाईकोर्ट ने पुलिस को लगाई... Patna Bungalow Controversy: राबड़ी देवी ने खाली किया सरकारी बंगला, लालू परिवार अब कौटिल्य नगर स्थित ... Brij Bhushan Sharan Singh Case: यौन शोषण मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट का फैसला सुरक्षित, 3 अगस्त को ... NADA Doping Bill 2026: डोपिंग अब बनेगा गंभीर अपराध, कोच और ड्रग सप्लायर को होगी 5 साल की जेल BMC Action: खुले मैनहोल में गिरने से व्यक्ति की मौत, बीएमसी ने दी 10 लाख की सहायता; जांच के लिए समित... Ram Niwas Mandir Dispute: राम मंदिर परिसर के पास पंचायती मंदिर पर कब्जे का आरोप, ट्रस्ट के महासचिव प... Assembly By-election 2026: बिहार, मध्य प्रदेश और गुजरात की 3 सीटों पर उपचुनाव का ऐलान, 30 जुलाई को ह... Delhi School Fee Rule: निजी स्कूलों को 15 जुलाई तक गठित करनी होगी फीस समिति, शिक्षा मंत्री आशीष सूद ... College Street Makeover: अग्निमित्रा पॉल के प्रस्ताव का विरोध, हॉकरों की आजीविका और सौंदर्यीकरण के ब... Maharashtra Rain News: मूसलाधार बारिश से महाराष्ट्र बेहाल, करंट लगने से किशोरी की मौत; NDRF तैनात

Rahul Gandhi vs Govt: CAPF विधेयक पर राहुल का तीखा हमला! एनकाउंटर में पैर गंवाने वाले जांबाज का वीडियो शेयर कर पूछे कड़े सवाल

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने मोदी सरकार के केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक 2026 पर निशाना साधा है. उन्होंने असिस्टेंट कमांडेंट अजय मलिक का जिक्र करके सरकार पर हमला किया है. राहुल ने एक्स पर वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा, अजय मलिक ने देश की रक्षा में सब कुछ दांव पर लगा दिया और इन्हें क्या मिला. यह सिर्फ एक अफसर की पीड़ा नहीं. यह लाखों CAPF जवानों के साथ हो रहा संस्थागत अन्याय है. बता दें कि अजय मलिक ने नक्सली मुठभेड़ के दौरान IED ब्लास्ट में अपना एक पैर खो दिया था.

राहुल गांधी ने लिखा, असिस्टेंट कमांडेंट अजय मलिक ने नक्सली मुठभेड़ के दौरान IED ब्लास्ट में अपना एक पैर खो दिया. देश की रक्षा में सब कुछ दांव पर लगा दिया. और इस बलिदान के बदले मिला क्या? 15 साल से अधिक की निष्ठापूर्ण सेवा के बावजूद प्रमोशन नहीं, अपनी ही फोर्स को लीड करने का अधिकार नहीं, क्योंकि सभी शीर्ष पद IPS अफसरों के लिए आरक्षित हैं.

कांग्रेस सांसद ने और क्या कहा?

राहुल ने आगे लिखा कि यह सिर्फ एक अफसर की पीड़ा नहीं है. यह लाखों CAPF जवानों के साथ हो रहा संस्थागत अन्याय है. ये जवान सीमाओं पर तैनात रहते हैं, आतंक और नक्सलवाद से लोहा लेते हैं, लोकतंत्र के उत्सव चुनावों को सुरक्षित बनाते हैं. लेकिन जब इनके अधिकार और सम्मान की बात आती है, तो व्यवस्था मुंह फेर लेती है.

उन्होंने लिखा कि खुद CAPF के जवान इस भेदभाव के विरुद्ध हैं. सुप्रीम कोर्ट तक ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं. फिर भी, वर्तमान सरकार इसी अन्याय को कानूनी रूप से स्थायी बनाने पर आमादा है. यह विधेयक केवल एक करियर रोकने का प्रयास नहीं है. यह उन लोगों का मनोबल तोड़ने की कोशिश है जो देश की पहली रक्षा पंक्ति हैं और जब उनका मनोबल टूटता है, तो राष्ट्रीय सुरक्षा की नींव हिलती है.

कांग्रेस सांसद ने कहा कि हम CAPF के जवानों का सम्मान सिर्फ शब्दों में नहीं, नीतियों में करते हैं. कांग्रेस का साफ वादा है कि हमारी सरकार आते ही यह भेदभावपूर्ण कानून समाप्त होगा, क्योंकि जो देश के लिए लड़ता है, उसे नेतृत्व का अधिकार मिलना ही चाहिए.

विधेयक के बारे में जानें

विधेयक सीएपीएफ के प्रशासन, सेवा शर्तों और संचालन समन्वय के लिए एक समान कानूनी ढांचा प्रदान करने का प्रयास करता है. वर्तमान में, सभी सीएपीएफ… सीआरपीएफ, सीआईएसएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी और एसएसबी — अपने-अपने अधिनियमों द्वारा संचालित होते हैं. विधेयक के अनुसार, आईपीएस अधिकारियों को सीएपीएफ में नियुक्त करने के लिए, महानिरीक्षक के पद के 50 प्रतिशत और अतिरिक्त महानिदेशक के पद के न्यूनतम 67 प्रतिशत पद प्रतिनियुक्ति के माध्यम से भरे जाएंगे. यह प्रस्तावित कानून उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद आया है, जिसने अक्टूबर 2025 में केंद्र की अपील खारिज कर दी थी.