Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
दुनिया के सबसे ऊंचे चिनाब रेल ब्रिज पर बादलों को चीरती गुजरी वंदे भारत, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने... जयपुर में दो दोहरे मर्डर केस का खुलासा: शराब के खर्च और बकरियों की रखवाली के विवाद में हत्या, 3 गिरफ... समस्तीपुर में दर्दनाक वारदात! खेत में चारा लेने गई नाबालिग से गैंगरेप, पीड़िता की हालत गंभीर "जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अटूट अंग थे, हैं और रहेंगे": NYT के 'Pakistani Kashmir' शब्द पर भारत... दिल्ली में कांवड़ यात्रा को लेकर ट्रैफिक एडवाइजरी जारी! जानें 11 अगस्त तक कौन-कौन से रास्ते रहेंगे ब... गुरुग्राम की 'लुटेरी दुल्हन' गिरफ्तार! प्यार के जाल में फंसाकर ऐंठे 21 लाख, 13 मुकदमों का खुलासा बांकीपुर उपचुनाव में वोटिंग के बीच सियासी घमासान, बीजेपी ने जन सुराज पर लगाया फर्जी मतदान का आरोप आरएसएफ नेता ने अपने लड़ाकों को खुली छूट दी जापान के फुजिसावा शहर में नये किस्म का वैचारिक तनाव बढ़ा 'वंदे मातरम' का अपमान अब अपराध! राज्यसभा में बिल पास; कांग्रेस के वॉकआउट पर नित्यानंद राय का तीखा हम...

भगोड़ा पूर्व आर्मी कैप्टन अंततः पकड़ा गया

एक एलपीजी बुकिंग ने खोला वर्षों से छिपाया गया राज

राष्ट्रीय खबर

चंडीगढ़: अपनी पत्नी की हत्या के दोषी और चार साल से पुलिस की आंखों में धूल झोंक रहे पूर्व आर्मी कैप्टन संदीप तोमर की फरारी का अंत आखिरकार एक छोटी सी डिजिटल चूक से हो गया। ओडिशा के सुदूर इलाकों से लेकर बेंगलुरु के आईटी हब तक, तोमर ने अपनी पहचान बदलकर एक पूरी तरह से नई और आलीशान ज़िंदगी बसा ली थी। लेकिन 25 मार्च को पंजाब पुलिस ने उसे मध्य प्रदेश के एक दूरदराज इलाके से दबोच लिया। इस गिरफ्तारी की सबसे अहम कड़ी फरवरी में की गई एक एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग बनी, जिसने पुलिस को उसका डिजिटल सुराग दे दिया।

संदीप तोमर को साल 2014 में अपनी पत्नी की हत्या के जुर्म में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। हालांकि, अपील लंबित होने के कारण उसे जमानत मिल गई थी। साल 2022 में जब पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय ने उसकी अपील खारिज कर दी और उसे आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया, तो वह फरार हो गया। इसके बाद अगले चार वर्षों तक उसने अपनी पहचान छुपाने के लिए आधार कार्ड के विवरण बदले, ड्राइविंग लाइसेंस में हेरफेर किया और दर्जनों सिम कार्डों का इस्तेमाल किया। वह इतना शातिर था कि उसने अपने परिवार तक से सारे संपर्क तोड़ लिए थे।

इस मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम के प्रमुख एसपी अश्वंत सिंह धालीवाल ने बताया कि तोमर अत्यधिक शिक्षित था और अंग्रेजी पर उसकी जबरदस्त पकड़ थी। इसी का फायदा उठाकर उसने कॉर्पोरेट जगत में अपनी जगह बनाई। साल 2022 में वह ओडिशा के अकोला चला गया, जहां उसने एक फैक्ट्री में प्रशासनिक अधिकारी के रूप में काम किया। 2023 में वह बेंगलुरु शिफ्ट हो गया, जहां उसे कपड़ों की दिग्गज कंपनी रेमंड की एक सहायक इकाई में प्लांट लीड की नौकरी मिल गई। वहां उसका वेतन 1.6 लाख रुपये प्रति माह था।

बेंगलुरु में रहते हुए तोमर ने पिंकी सिंह नाम की महिला से दूसरी शादी भी कर ली। पुलिस के अनुसार, उसकी नई पत्नी को उसके आपराधिक अतीत या उसके भगोड़ा होने की भनक तक नहीं थी। वह पूरी तरह से एक अंडरकवर जीवन जी रहा था, जहां उसके रेंटल एग्रीमेंट और मोबाइल नंबर अलग-अलग पहचानों पर थे। हालांकि, घर के लिए बुक किए गए एक गैस सिलेंडर के डेटा ने पंजाब पुलिस को उसके वर्तमान स्थान तक पहुँचा दिया। पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस की मदद से उसे ट्रैक किया और उसकी दूसरी ज़िंदगी का पर्दाफाश कर दिया।