बजट सत्र में विपक्ष का जोरदार विरोध भी हुआ दरकिनार
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प्रवर समिति के पास नहीं भेजा गया
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आईपीएस अफसरों को अधिक पद दिये
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दूसरे बलों के अफसरों की प्रोन्नति बाधित
राष्ट्रीय खबर
नई दिल्ली: संसद के बजट सत्र के दौरान एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, राज्यसभा ने केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक को अपनी मंजूरी दे दी है। इस विधेयक का प्राथमिक उद्देश्य विभिन्न केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) के कर्मियों के लिए एक एकीकृत कानूनी ढांचा तैयार करना है। वर्तमान में, पांच अलग-अलग केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के लिए सेवा नियमों की अलग-अलग व्यवस्थाएं लागू हैं, जिसे यह विधेयक एक एकल और सुव्यवस्थित प्रणाली से बदलने का प्रस्ताव रखता है। इस विधेयक के सबसे महत्वपूर्ण और चर्चा का विषय रहे प्रावधानों में सीएपीएफ के उच्च पदों पर भारतीय पुलिस सेवा अधिकारियों की नियुक्ति शामिल है। विधेयक के अनुसार
महानिरीक्षक के कुल पदों का 50 प्रतिशत हिस्सा प्रतिनियुक्ति पर आए आईपीएस अधिकारियों द्वारा भरा जाएगा। अतिरिक्त महानिदेशक रैंक में कम से कम 67 प्रतिशत पदों पर आईपीएस अधिकारियों की नियुक्ति होगी।विशेष महानिदेशक और महानिदेशक जैसे शीर्ष पदों को 100 प्रतिशत केवल प्रतिनियुक्ति पर आए आईपीएस अधिकारियों के माध्यम से ही भरा जाएगा।
विधेयक पर हुई चर्चा का उत्तर देते हुए गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि इस कानून का मूल उद्देश्य बलों की दक्षता और मनोबल को बढ़ाना है। उन्होंने तर्क दिया कि एक समान प्रशासनिक ढांचा होने से बलों के बीच समन्वय बेहतर होगा और परिचालन संबंधी बाधाएं दूर होंगी।
हालांकि, विपक्ष ने इस विधेयक के कई प्रावधानों पर कड़ी आपत्ति जताई। राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने मांग की कि इस विधेयक को विस्तृत समीक्षा के लिए एक प्रवर समिति के पास भेजा जाना चाहिए। विपक्ष का मुख्य विरोध बलों के कैडर अधिकारियों की पदोन्नति के अवसरों को सीमित करने और आईपीएस अधिकारियों के प्रभुत्व को लेकर था।
सदन में जोरदार नारेबाजी के बीच विपक्षी सदस्यों ने कार्यवाही का बहिष्कार करते हुए वॉकआउट कर दिया। इस पर पलटवार करते हुए सदन के नेता जे.पी. नड्डा ने कहा कि विपक्ष की बहस में कोई दिलचस्पी नहीं है और वे संसदीय प्रक्रिया का सम्मान नहीं कर रहे हैं। भारी हंगामे के बावजूद, विधेयक को ध्वनि मत से पारित कर दिया गया।