तमाम देशों के सैन्य ठिकानों पर हमला जारी
बेरूतः गत 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल द्वारा युद्ध छेड़े जाने के बाद से, ट्रम्प प्रशासन का दावा है कि उसने इस्लामी गणराज्य की सैन्य क्षमताओं को लगभग मिटा दिया है। रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने पिछले सप्ताह घोषणा की थी कि दर्ज इतिहास में कभी भी किसी देश की सेना को इतनी जल्दी और इतनी प्रभावी ढंग से बेअसर नहीं किया गया है।
हालांकि, एक महीने से अधिक समय तक चले विनाशकारी अमेरिकी-इजरायली हवाई हमलों के बावजूद, ईरान की सैन्य शक्ति एक जिद्दी दुश्मन बनी हुई है। इजरायल और खाड़ी देशों पर ईरान के निरंतर हमले क्षेत्रीय अराजकता और बड़े आर्थिक व राजनीतिक झटकों का कारण बन रहे हैं।
ईरानी मिसाइलें आज भी इजरायली हवाई क्षेत्र में प्रवेश कर रही हैं और नागरिक हताहत हो रहे हैं। ईरान के सस्ते ड्रोन पड़ोसी देशों की वायु रक्षा प्रणालियों को चकमा देकर खाड़ी देशों की अजेयता की छवि को खंडित कर रहे हैं और अमेरिकी सैनिकों को घायल कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त, तेल और गैस टैंकरों पर हमले की धमकियों ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापार को ठप कर दिया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा कीमतें आसमान छू रही हैं।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के संवर्धित यूरेनियम के भंडार को सुरक्षित करने और हॉर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खुलवाने के लिए एक तरफ बातचीत की पेशकश की है, तो दूसरी तरफ अत्यधिक विनाश की धमकी दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान की रणनीति केवल संघर्ष में तब तक टिके रहने की है, जब तक वाशिंगटन दबाव में आकर युद्ध समाप्ति का रास्ता न ढूंढने लगे। स्टिमसन सेंटर की सैन्य विशेषज्ञ केली ग्रिएको के अनुसार, ईरान का लक्ष्य अमेरिका के लिए युद्ध की लागत को असहनीय बनाना है।
युद्ध के पहले दिन से ही अमेरिकी और इजरायली अधिकारी ईरान की कम होती मिसाइल फायरिंग को अपनी सफलता के प्रमाण के रूप में पेश कर रहे हैं। ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल डैन केन के अनुसार, ईरान द्वारा दागी गई बैलिस्टिक मिसाइलों की संख्या में युद्ध के पहले दिन की तुलना में 86 फीसद की गिरावट आई है। रक्षा सचिव हेगसेथ ने इस आंकड़े को 90 फीसद तक बताया है। मंगलवार को ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर दावा किया कि ईरान अनिवार्य रूप से तबाह हो चुका है।
आंकड़े भी हमलों में कमी की पुष्टि करते हैं। युद्ध के दूसरे दिन (1 मार्च) ईरान ने लगभग 100 हमले किए थे, जो अगले ही दिन गिरकर 53 रह गए। पिछले साढ़े तीन हफ्तों से ईरान प्रतिदिन औसतन 30 हमले कर रहा है। हालांकि, विशेषज्ञ इसे केवल सैन्य क्षमता की कमी नहीं मानते। केली ग्रिएको का तर्क है कि यह क्षमता से अधिक रणनीति का मामला हो सकता है।
ईरान संभवतः अपनी मिसाइलों और ड्रोनों का भंडार खत्म करने के बजाय उन्हें राशन (सीमित उपयोग) के रूप में इस्तेमाल कर रहा है ताकि वह लंबे समय तक संघर्ष जारी रख सके। यह सोची-समझी रणनीति अमेरिका को एक लंबे और थका देने वाले युद्ध में उलझाने के लिए बनाई गई है, जिससे यह साबित होता है कि भारी बमबारी के बावजूद ईरान का रक्षा तंत्र पूरी तरह ध्वस्त नहीं हुआ है।