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चरखी दादरी में सरसों की सरकारी खरीद सुस्त; खुले बाजार में मिल रहे ऊंचे दाम, मंडियां हुईं सुनसान

चरखी दादरीः हरियाणा के किसानों का ‘काला सोना’ कही जाने वाली सरसों की फसल की सरकारी खरीद शुरू हो चुकी है, लेकिन इस बार अनाज मंडियों की तस्वीर बदली हुई नजर आ रही है. जहां बीते वर्ष सरसों बेचने के लिए वाहनों की दो-दो किलोमीटर लंबी कतारें लगी रहती थीं, वहीं इस साल मंडियां लगभग खाली पड़ी हैं. बाजार में सरसों के भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से करीब 500 रुपये अधिक होने के कारण किसान अपनी फसल को मंडी में लाने की बजाय स्टॉक कर रहे हैं. इसका असर सरकारी खरीद पर साफ दिखाई दे रहा है.

प्रति क्विंटल मार्केट रेट सरकारी रेट से करीब 500 रुपये अधिक: बता दें कि चरखी दादरी में सरसों की सरकारी खरीद के दूसरे दिन केवल 50 किसानों के ही गेट पास कटे. इसका मुख्य कारण न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) और मार्केट रेट के बीच का बड़ा अंतर है. इस बार सरसों का मार्केट रेट सरकारी रेट से करीब 500 रुपये प्रति क्विंटल अधिक चल रहा है. बेहतर दाम मिलने और भविष्य में भाव और बढ़ने की उम्मीद के चलते किसान अपनी फसल को मंडियों में लाने के बजाय स्टॉक कर रहे हैं. फिलहाल केवल वही किसान मंडी पहुंच रहे हैं, जिन्हें तत्काल नकदी की आवश्यकता है.

अवैध भंडारण और कालाबाजारी पर प्रशासन की नजरः मार्केट कमेटी सचिव विजय कुमार ने बताया कि “विभाग ने सीधे रूप से सरसों खरीदने वाली तेल मिलों पर अपनी निगरानी सख्त कर दी है. अधिकारियों और कर्मचारियों की रैंडम ड्यूटी लगा दी है ताकि खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे. अवैध भंडारण और कालाबाजारी को रोकने के लिए प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है. मार्केट कमेटी ने स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों पर मार्केट फीस के साथ-साथ जीएसटी और भारी जुर्माना भी लगाया जाएगा.”