पाकिस्तानी हमले में नागरिक हताहत हुए है
काबुलः अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच दशकों का सबसे भीषण सैन्य संघर्ष एक बार फिर गहरा गया है। रविवार को अफगानिस्तान सरकार ने पाकिस्तानी सेना पर पूर्वी शहर असदाबाद के बाहरी इलाकों में भारी गोलाबारी करने का गंभीर आरोप लगाया है। कुनार प्रांत में हुई इस गोलाबारी में कम से कम एक व्यक्ति की मौत हो गई और महिलाओं व बच्चों सहित 16 अन्य लोग घायल हो गए हैं। अफगान उप-प्रवक्ता हमदुल्ला फितरत के अनुसार, पाकिस्तानी सेना ने मोर्टार और भारी हथियारों का उपयोग करके ग्रामीण रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया, जिससे आम नागरिकों के घरों को भारी क्षति पहुँची है।
यह ताजा झड़प फरवरी के उत्तरार्ध में शुरू हुए उस व्यापक संघर्ष का हिस्सा है, जिसे पाकिस्तान ने पिछले महीने खुला युद्ध घोषित किया था। दोनों देशों के बीच तनाव का मुख्य कारण आतंकवाद और सीमा सुरक्षा है। पाकिस्तान का आरोप है कि अफगान तालिबान अपने देश में पाकिस्तानी तालिबान जैसे चरमपंथियों को सुरक्षित पनाहगाह मुहैया करा रहा है, जो सीमा पार पाकिस्तान में हमले करते हैं। हालांकि, काबुल इन आरोपों को लगातार खारिज करता आया है। इस खींचतान ने अब एक पूर्ण सैन्य टकराव का रूप ले लिया है, जिसमें हवाई हमले और सीमा पार से भीषण गोलाबारी आम हो गई है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए यह स्थिति अत्यंत चिंताजनक है, क्योंकि अल-कायदा और इस्लामिक स्टेट जैसे आतंकी संगठन इस अस्थिरता का फायदा उठाकर क्षेत्र में फिर से पैर पसारने की कोशिश कर रहे हैं। इसी महीने की शुरुआत में, अफगानिस्तान ने दावा किया था कि काबुल में एक नशा मुक्ति अस्पताल पर हुए पाकिस्तानी हवाई हमले में 400 से अधिक लोग मारे गए थे। हालांकि पाकिस्तान ने इसे खारिज करते हुए कहा था कि उसने केवल एक गोला-बारूद डिपो को निशाना बनाया था। संयुक्त राष्ट्र अभी भी इन हताहतों की संख्या की पुष्टि करने में जुटा है।
सऊदी अरब, तुर्की और कतर की मध्यस्थता के बाद ईद-अल-फितर के अवसर पर पिछले सप्ताह एक अस्थायी युद्धविराम घोषित किया गया था। लेकिन इस सप्ताह की शुरुआत में युद्धविराम की अवधि समाप्त होते ही बुधवार से फिर से भीषण लड़ाई शुरू हो गई। असदाबाद में हुआ रविवार का हमला यह दर्शाता है कि कूटनीतिक प्रयास फिलहाल विफल साबित हो रहे हैं। सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले हजारों नागरिक विस्थापित हो चुके हैं और मानवीय स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। यदि यह संघर्ष और बढ़ता है, तो यह पूरे दक्षिण एशिया की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता है।