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पश्चिम एशिया के संकट पर केंद्र सरकार की पहल

सर्वदलीय बैठक बुलाने का फैसला लिया

  • देश के हालात पर भी चर्चा होगी

  • विपक्ष ने लगातार आरोप लगाये

  • काम रोको प्रस्ताव भी आया है

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः केंद्र सरकार ने पश्चिम एशिया (वेस्ट एशिया) में बढ़ते तनाव और उससे उत्पन्न परिस्थितियों पर चर्चा के लिए बुधवार को एक सर्वदलीय बैठक बुलाई है। यह कदम क्षेत्र में अस्थिर बाजार स्थितियों और देश में गहराते एलपीजी संकट की रिपोर्टों के बीच उठाया गया है। विपक्ष लगातार सरकार पर स्थिति को संभालने में विफल रहने का आरोप लगा रहा था और जल्द से जल्द सर्वदलीय बैठक बुलाने का दबाव बना रहा था।

मंगलवार को कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने पश्चिम एशिया संघर्ष से निपटने के सरकार के तरीकों की तीखी आलोचना की। वहीं, राज्यसभा में सीपीआई (एम) के सांसद जॉन ब्रिटास ने 2003 के उस संसदीय प्रस्ताव का हवाला दिया जिसमें इराक युद्ध की निंदा की गई थी, और सरकार से ईरान के मुद्दे पर भी वैसा ही रुख अपनाने का आग्रह किया। लोकसभा में भी गूंज सुनाई दी, जहाँ कांग्रेस सांसद विजय वसंत ने एलपीजी सिलेंडरों की कमी और कीमतों में कथित अनियमितताओं पर काम रोको प्रस्ताव पेश किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को राज्यसभा में भारत की ऊर्जा सुरक्षा और संघर्ष के व्यापक प्रभाव पर विस्तार से बात की। उन्होंने कहा, लगभग 1 करोड़ भारतीय खाड़ी देशों में रहते और काम करते हैं। उनके जीवन और आजीविका की रक्षा करना भारत के लिए गहरी चिंता का विषय है। कई जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे हुए हैं, जिनमें बड़ी संख्या में भारतीय चालक दल के सदस्य मौजूद हैं। ऐसी कठिन परिस्थिति में, यह आवश्यक है कि भारत का उच्च सदन शांति और संवाद का एकजुट संदेश दे।

दूसरी ओर, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को देश की सैन्य तैयारियों की समीक्षा के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में सीडीएस जनरल अनिल चौहान, वायुसेना प्रमुख एयर मार्शल अमर प्रीत सिंह और डीआरडीओ अध्यक्ष समीर कामत सहित शीर्ष सैन्य अधिकारी शामिल हुए, ताकि वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों के बीच भारत की रक्षा तत्परता का आकलन किया जा सके।