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हर किसी को एक बार जेल जाना चाहिएः वांगचुक

छह महीने बाद जेल से निकलने के बाद नई बात कही

राष्ट्रीय खबर

श्रीनगरः कड़े राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत छह महीने की हिरासत काटने के बाद रिहा हुए लद्दाख के कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने एक साहसी संदेश के साथ सार्वजनिक जीवन में वापसी की है। नई दिल्ली में अपनी रिहाई के बाद पहली प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने जेल के अनुभव को डर से मुक्ति और अधिकारों के लिए आवाज उठाने के प्रतीक के रूप में वर्णित किया।

170 दिनों के बाद अपनी पहली सार्वजनिक उपस्थिति में वांगचुक ने मंगलवार को कहा, जेलों को लेकर समाज में एक गहरा डर व्याप्त है, जिसे दूर करने की जरूरत है। हर किसी को अपने जीवन में कम से कम एक बार जेल जाना चाहिए—क्योंकि मूलतः इसका अर्थ है किसी उद्देश्य के लिए अपनी आवाज उठाने का साहस रखना।

उन्होंने जेल के अनुभव को आत्मबल बढ़ाने वाला बताया। वांगचुक ने लगभग 45 मिनट लंबी प्रेस वार्ता में अपनी पत्नी गीतांजलि जे. अंग्मो के साथ लद्दाख के भविष्य पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि उनकी व्यक्तिगत जीत (रिहाई) तब तक अधूरी है जब तक लद्दाख की मांगों को पूरा नहीं किया जाता। उन्होंने एक विन-विन-विन फॉर्मूले की वकालत की। सोनम वांगचुक और उनके साथियों की कानूनी जीत। लद्दाख और हिमालयी क्षेत्र के पर्यावरण व संस्कृति की जीत (राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची)। भारत सरकार की वैश्विक छवि में सुधार, जो बातचीत के माध्यम से समाधान निकालकर संभव है।

सोनम वांगचुक को पिछले साल 26 सितंबर को उस समय गिरफ्तार किया गया था, जब लद्दाख को राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर किया जा रहा विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया था। इस संघर्ष में चार नागरिकों की जान भी गई थी। वांगचुक ने उम्मीद जताई कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में न केवल आदेश रद्द करेगा, बल्कि एनएसए जैसे कड़े कानूनों के उपयोग पर भविष्य के नीति निर्माताओं के लिए मार्गदर्शक दिशा-निर्देश भी जारी करेगा। उन्होंने सरकार से अपील की कि वे पिछले छह वर्षों से संघर्ष कर रहे लद्दाख के लोगों के साथ चर्चा की मेज पर आएं और सार्थक संवाद शुरू करें।