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पंजाब में शराब के शौकीनों को झटका! नई आबकारी नीति 2026-27 को मंजूरी; महंगी होगी शराब, जानें ठेकों को लेकर क्या है सरकार का नया आदेश

जालंधर/चंडीगढ़: पंजाब सरकार की वर्ष 2026-27 की आबकारी नीति के तहत शराब ठेकेदारों को इस बार 6-7 प्रतिशत राजस्व वृद्धि के साथ अपने शराब ठेकों के समूहों को नवीनीकृत करने का विकल्प दिया गया था। अब तक राज्य के करीब 71 प्रतिशत ठेकेदारों ने अपने ठेकों का नवीनीकरण करवा लिया है, जबकि शेष 29 प्रतिशत ठेकों के आवंटन के लिए अब सरकार टैंडर प्रणाली अपनाएगी। सरकार अब टैंडर लगाएगी और उसमें अगर पुराने या नए ठेकेदारों द्वारा ठेके लेने के लिए आवेदन किया जाता है तो ठीक है अन्यथा सरकार को दोबारा से टैंडर लगाने के लिए शराब ठेकों की आरक्षित कीमत को कम करना होगा ताकि ठेके अलॉट किए जा सकें।

ठेकेदारों के अनुसार बरनाला, फरीदकोट, फतेहगढ़ साहिब, गुरदासपुर, मानसा, पटियाला और तरनतारन जिलों में सभी समूहों का पूर्ण नवीनीकरण हो चुका है। वहीं लुधियाना में 73 प्रतिशत, जालंधर में 76 प्रतिशत और अमृतसर में 75 प्रतिशत ठेकों का नवीनीकरण हुआ है। इसके विपरीत होशियारपुर में 46 प्रतिशत, कपूरथला में 43 प्रतिशत और मोगा में 40 प्रतिशत ठेकेदारों ने ही नवीनीकरण का विकल्प चुना है।

ठेकेदारों के अनुसार वर्ष 2025-26 के दौरान भारी वित्तीय नुकसान इस बार नवीनीकरण न करने का सबसे बड़ा कारण रहा। उनका कहना है कि आई.एम.एफ.एल (अंग्रेजी शराब) के ओपन कोटा की नीति से बाजार में अंग्रेजी शराब की अत्यधिक आपूर्ति हो गई, जिससे खुदरा ठेकेदारों के बीच तीखी प्रतिस्पर्धा बढ़ी और मुनाफा कम हो गया। ठेकेदारों ने कहा कि ओपन कोटा व्यवस्था का अधिक लाभ शराब फैक्ट्रियों और डिस्टिलरी मालिकों को मिला, जबकि खुदरा ठेकेदारों को घटते मुनाफे और बाजार की प्रतिस्पर्धा का सबसे अधिक नुकसान उठाना पड़ा। ठेकेदारों ने सरकार से मांग की है कि आबकारी राजस्व को टिकाऊ बनाने के लिए आई.एम.एफ.एल के ओपन कोटा के आबंटन को सख्ती से नियंत्रित किया जाए।

ठेकेदारों का कहना है कि यदि सरकार आई.एम.एफ.एल के ओपन कोटा की व्यवस्था पर सख्त नियंत्रण नहीं करती तो आने वाले समय में कई और ठेकेदार कारोबार से बाहर हो सकते हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि बाजार में आपूर्ति और मांग के बीच संतुलन बनाए रखने के लिए नीति में आवश्यक सुधार किए जाएं, ताकि खुदरा ठेकेदारों को भी उचित मुनाफा मिल सके और राज्य के आबकारी राजस्व पर भी नकारात्मक प्रभाव न पड़े।

अंग्रेजी शराब के ओपन कोटा सिस्टम को खत्म करने की मांग 

पंजाब के शराब ठेकेदारों ने राज्य सरकार से मांग की है कि अंग्रेजी शराब के ओपन कोटा सिस्टम को तुरंत समाप्त किया जाए, क्योंकि इससे ठेकेदारों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। ठेकेदारों का कहना है कि पंजाब में देसी शराब की बिक्री सरकार द्वारा नियंत्रित और निर्धारित कोटे के अनुसार होती है, इसलिए उसी प्रकार अंग्रेजी शराब की आपूर्ति भी नियंत्रित की जानी चाहिए। उनका कहना है कि अंग्रेजी शराब के ओपन कोटा के कारण बाजार में इसकी अधिक आपूर्ति हो रही है, जिससे ठेकेदारों के बीच अस्वस्थ प्रतिस्पर्धा पैदा हो रही है और उनके व्यवसाय पर बुरा असर पड़ रहा है। ठेकेदारों ने सरकार से मांग की कि इस संबंध में विशेष अधिसूचना जारी कर अंग्रेजी शराब के कोटे को भी विनियमित किया जाए। उनका यह भी कहना है कि मौजूदा ओपन कोटा प्रणाली से सबसे अधिक लाभ डिस्टिलरी कंपनियों को हो रहा है, जबकि ठेकेदारों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। ठेकेदारों का कहना है कि यदि इस व्यवस्था को जारी रखा गया तो आने वाले समय में कई ठेकेदारों के लिए कारोबार चलाना मुश्किल हो जाएगा। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि बाजार में संतुलन बनाए रखने और ठेकेदारों के हितों की रक्षा के लिए अंग्रेजी शराब के ओपन कोटा सिस्टम पर जल्द पुनर्विचार किया जाए।

नई आबकारी नीति का विश्लेषण

कुल शराब ठेके (वेंड्स) : 207
नवीनीकरण हो चुके : 147
अभी लंबित : 60
कुल नवीनीकरण प्रतिशत : 71 प्रतिशत