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यूएई के फुजैराह पोर्ट पर ड्रोन हमला

खार्ग पर अमेरिकी हमले के तुरंत बाद ईरानी की कार्रवाई

दुबईः ईरान के खार्ग द्वीप पर हुए भीषण अमेरिकी हमले की गूँज अभी शांत भी नहीं हुई थी कि वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला के एक और महत्वपूर्ण स्तंभ, संयुक्त अरब अमीरात के फुजैराह पोर्ट पर एक संदिग्ध ड्रोन हमले ने दुनिया को दहला दिया। शनिवार की शाम हुए इस हमले ने न केवल क्षेत्रीय तनाव को चरम पर पहुँचा दिया है, बल्कि समुद्री सुरक्षा पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं।

फुजैराह बंदरगाह दुनिया के सबसे बड़े जहाजों में ईंधन भरने वाले केंद्रों में से एक है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसकी भौगोलिक स्थिति है; यह हॉर्मुज जलडमरूमध्य के बाहर ओमान की खाड़ी के तट पर स्थित है। इस कारण, युद्ध या तनाव की स्थिति में यह खाड़ी के देशों के लिए तेल निर्यात का एक सुरक्षित वैकल्पिक मार्ग माना जाता रहा है।

यूएई के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, शनिवार शाम कम से कम तीन कामिकेज़ (आत्मघाती) ड्रोनों ने इस बंदरगाह को निशाना बनाया। इन ड्रोनों ने सीधे तेल लोडिंग टर्मिनल और वहां खड़े एक विशाल टैंकर पर प्रहार किया। हमले के तुरंत बाद टर्मिनल के एक हिस्से में भीषण आग लग गई। हालांकि स्थानीय दमकल विभाग ने घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया और किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन सुरक्षा कारणों से बंदरगाह के सभी ऑपरेशंस को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस हमले का समय और तरीका इसे महज इत्तेफाक नहीं रहने देता। खार्ग द्वीप पर अमेरिकी प्रहार के कुछ ही घंटों बाद हुआ यह हमला सीधे तौर पर एक प्रतिशोध प्रतीत होता है। रक्षा विश्लेषकों का संदेह है कि इसके पीछे ईरान समर्थित मिलिशिया समूहों का हाथ हो सकता है, जिनका उद्देश्य यह संदेश देना है कि यदि ईरान का तेल निर्यात रुकेगा, तो क्षेत्र का कोई भी अन्य मार्ग सुरक्षित नहीं रहेगा।

इस घटना ने समुद्री व्यापारिक जगत में हड़कंप मचा दिया है: ओमान की खाड़ी में बढ़ते जोखिम को देखते हुए समुद्री सुरक्षा फर्मों ने जहाजों का बीमा प्रीमियम रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ा दिया है। खाड़ी क्षेत्र से गुजरने वाले सभी व्यापारिक जहाजों को हाई अलर्ट पर रहने और अतिरिक्त सुरक्षा प्रोटोकॉल अपनाने के निर्देश दिए गए हैं। फुजैराह के बंद होने से वैश्विक तेल आपूर्ति श्रृंखला में और अधिक देरी होने की आशंका है, जिससे आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतें और बढ़ सकती हैं।