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ऐसे मुद्दे पर सिर्फ भाषण देने का काम नहीं: शशि थरूर

पश्चिम एशिया संकट पर कांग्रेस सांसद का जोरदार हमला

  • यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया की मांग है

  • रसोई गैस का मुद्दा भी जुड़ा हुआ है

  • लिखित भाषण पढ़ने से काम नहीं चलेगा

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर द्वारा पश्चिम एशिया (ईरान-इजराइल संघर्ष) की स्थिति पर दिए गए बयान को लेकर सरकार की कड़ी आलोचना की। थरूर ने संसद भवन के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि इतने गंभीर अंतरराष्ट्रीय मुद्दे पर केवल बयान पढ़ देना और सांसदों को चर्चा की अनुमति न देना संसदीय मर्यादा के खिलाफ और अनुचित है।

शशि थरूर ने जोर देकर कहा कि पश्चिम एशिया का संघर्ष भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है और इस पर सदन में विस्तृत बहस होनी चाहिए। उन्होंने कहा, संसद का उद्देश्य उन मुद्दों को उठाना है जो भारत के लिए मायने रखते हैं। बिना किसी प्रश्नकाल या चर्चा के केवल एक वक्तव्य पढ़ देना सदस्यों के साथ न्याय नहीं है।

थरूर के अनुसार, विपक्ष ऊर्जा सुरक्षा, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और हाल ही में बढ़े एलपीजी के दामों पर सरकार से सवाल पूछना चाहता था, जिसके लिए उन्हें अवसर नहीं दिया गया। उन्होंने तर्क दिया कि भले ही निर्णय सरकार को लेना है, लेकिन संसद को राष्ट्र के विभिन्न वर्गों के विचारों को सुनने के मंच के रूप में इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

कांग्रेस के संगठन महासचिव और सांसद के.सी. वेणुगोपाल ने भी इस मांग का समर्थन किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि पश्चिम एशिया की स्थिति कोई दलीय मुद्दा नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय चिंता का विषय है। उन्होंने मांग की कि सरकार को इस संवेदनशील मसले पर विपक्ष को विश्वास में लेना चाहिए।

इससे पहले, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने दोनों सदनों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम एशिया की बदलती परिस्थितियों पर निरंतर नजर रख रहे हैं। उन्होंने भारत के हितों को रेखांकित करते हुए कहा कि खाड़ी देशों में लगभग एक करोड़ भारतीय रहते हैं और ईरान में भी हजारों भारतीय छात्र और कामकाजी लोग मौजूद हैं।

विदेश मंत्री ने स्वीकार किया कि यह क्षेत्र भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और तेल-गैस की आपूर्ति में किसी भी तरह की बाधा या अस्थिरता भारत के लिए गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि सरकार ने ईरान में मौजूद भारतीयों के लिए औपचारिक एडवाइजरी जारी की है और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे व्यापारिक मार्गों पर उत्पन्न संकट की निगरानी की जा रही है। जयशंकर ने आश्वस्त किया कि सरकार ऊर्जा बाजार की उपलब्धता और जोखिमों को ध्यान में रखते हुए भारतीय उपभोक्ताओं के हितों को सर्वोपरि रखेगी।