ईरान में सत्ता परिवर्तन असंभव हैः खुफिया रिपोर्ट
वाशिंगटनः नेशनल इंटेलिजेंस काउंसिल की एक वर्गीकृत रिपोर्ट के अनुसार, बड़े पैमाने पर सैन्य हमले के बावजूद ईरानी शासन के उखड़ने की संभावना बहुत कम है। वाशिंगटन पोस्ट द्वारा सार्वजनिक की गई यह रिपोर्ट, वर्तमान अमेरिका-इजरायल सैन्य अभियान शुरू होने से ठीक एक सप्ताह पहले पूरी की गई थी। यह रिपोर्ट ईरानी शासन की लचीली संरचना और उसकी उत्तरजीविता के कई महत्वपूर्ण कारकों पर प्रकाश डालती है।
खुफिया अधिकारियों ने दो प्रमुख निष्कर्ष निकाले हैं। पहला, ईरानी शासन ने ऐसे स्पष्ट प्रोटोकॉल और प्रणालियाँ स्थापित की हैं जो यह सुनिश्चित करती हैं कि शीर्ष स्तर के नेताओं (जैसे सर्वोच्च नेता) के मारे जाने के बाद भी शासन का अस्तित्व बना रहे। दूसरा, अमेरिकी खुफिया एजेंसियों का मानना है कि ईरान के वर्तमान विपक्षी समूह इतने बिखरे हुए और विभाजित हैं कि उनके लिए सत्ता पर कब्जा करना लगभग असंभव है।
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान बमबारी और सरकार के भीतर आंतरिक मतभेदों के बावजूद, किसी बड़े जन विद्रोह की संभावना फिलहाल नजर नहीं आती। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि इस रिपोर्ट में कुछ चरम स्थितियों पर विचार नहीं किया गया है, जैसे कि ईरान की धरती पर अमेरिकी सैनिकों को उतारना या विद्रोह भड़काने के लिए कुर्द समूहों को हथियार देना। ब्रुकिंग्स इंस्टीट्यूशन की विद्वान सुजैन मैलोनी ने इस आकलन को ईरानी प्रणाली की गहरी समझ वाला बताया है।
व्हाइट हाउस ने ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के लक्ष्यों को स्पष्ट करते हुए कहा है कि इसका उद्देश्य ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलों, उत्पादन क्षमता और नौसेना को पूरी तरह नष्ट करना है। साथ ही, इसका लक्ष्य ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना और उसके प्रॉक्सी समूहों को दी जाने वाली सहायता को खत्म करना है। व्हाइट हाउस की प्रवक्ता एना केली ने दावा किया कि ईरानी शासन पूरी तरह से टूट चुका है।
दूसरी ओर, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक विवादास्पद रुख अपनाते हुए कहा है कि वह व्यक्तिगत रूप से ईरान के अगले सर्वोच्च नेता के चयन को मंजूरी देंगे। उन्होंने दिवंगत अली खामेनेई के बेटे, मोज्तबा खामेनेई के उत्तराधिकार को अस्वीकार्य बताया है। ट्रंप का तर्क है कि खामेनेई की नीतियों को जारी रखने वाला कोई भी नेता अमेरिका को पांच साल के भीतर फिर से युद्ध में धकेल देगा।
ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबाफ ने ट्रंप के इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर कड़े शब्दों में लिखा कि ईरान का भाग्य केवल गर्वित ईरानी राष्ट्र द्वारा तय किया जाएगा, न कि एपस्टीन के गिरोह द्वारा। यह बयान ट्रंप और दिवंगत जेफरी एपस्टीन के पुराने संबंधों पर एक तीखा तंज था। फिलहाल, जहाँ खुफिया समुदाय जबरन सत्ता परिवर्तन को लेकर संशय में है, वहीं अमेरिका और इजरायल ने अपने हवाई हमलों को और तेज कर दिया है। ट्रंप ने ईरान को मध्य पूर्व का हारा हुआ खिलाड़ी करार दिया है और तेहरान से बिना शर्त आत्मसमर्पण की मांग की है। उन्होंने वादा किया है कि यदि तेहरान नई लीडरशिप स्वीकार करता है, तो अमेरिका ईरान की अर्थव्यवस्था के पुनर्निर्माण में मदद करेगा।