Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Kerala Politics: मुख्यमंत्री सतीशन और पीएम मोदी की बैठक; राज्य की प्राथमिकताओं और केंद्र से मदद पर र... Supreme Court Update: कानून के छात्रों की उपस्थिति पर SC का बड़ा फैसला; हाईकोर्ट के आदेश पर लगाई रोक Gurmeet Ram Rahim Parole: 16वीं बार जेल से बाहर आए गुरमीत राम रहीम; 30 दिन की पैरोल पर मचा सियासी बव... Amit Shah in Rajasthan: सीमा सुरक्षा हमारी प्राथमिकता; BSF जवानों के साहस और बलिदान को गृह मंत्री ने... Akhilesh Yadav Press Conference: यूपी में 'फर्जी एनकाउंटर' को लेकर अखिलेश यादव का बीजेपी पर बड़ा हमला Khagaria Encounter: बिहार एसटीएफ की बड़ी कार्रवाई; 50 हजार का इनामी कुख्यात अपराधी मोहम्मद बुद्दिन ढे... Bulandshahr Double Murder: ससुर-बहू के अवैध संबंधों ने बिगाड़ा परिवार; बेटे ने पिता और पत्नी को उतार... Gurugram Crime News: लिव-इन पार्टनर के साथ मिलकर पति ने की पत्नी की हत्या; शव बाथरूम में मिला, आरोपी... Rajasthan Heatwave Alert: गर्मी के चलते राजस्थान सरकार का बड़ा फरमान; दोपहर में जानवरों से काम लेने प... Ramgarh Crime News: राहुल दुबे गैंग का बड़ा खुलासा; पतरातू में बड़ी वारदात की योजना बनाते 6 अपराधी गिर...

आमची मुंबई और आमची मैंग्रोव का नारा बुलंद किया गया

मैंग्रोव बचाने के लिए सड़कों पर उतरे नागरिक

राष्ट्रीय खबर

मुंबईः ढलती दोपहर में कांदिवली के चारकोप सेक्टर स्थित तर्जन पॉइंट पर लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। ये नागरिक किसी उत्सव के लिए नहीं, बल्कि मुंबई की जीवनरेखा माने जाने वाले मैंग्रोव (सदाबहार तटीय वन) को बचाने के लिए मैंग्रोव मार्च निकालने जुटे थे। यह शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन महाराष्ट्र सरकार की प्रस्तावित वर्सोवा-भायंदर कोस्टल रोड परियोजना के खिलाफ था, जो शहर की नाजुक तटरेखा से लगभग 45,000 मैंग्रोव पेड़ों को खत्म करने का खतरा पैदा कर रही है।

अस्तित्व की लड़ाई और सरकार पर सवाल प्रदर्शनकारियों के बीच आक्रोश और विश्वासघात की भावना स्पष्ट थी। प्रदर्शनकारी गौरांग वोरा ने भीड़ को संबोधित करते हुए बुनियादी सवाल उठाया: मैंग्रोव जीवन हैं। यह तटीय सड़क कुछ कार मालिकों के लिए बनाई जा रही है, जबकि इसका विनाश लाखों स्थानीय लोगों को प्रभावित करेगा। उन्होंने सरकार की प्रतिपूरक वनीकरण योजना की आलोचना करते हुए कहा कि समुद्र तट से दूर अंतर्देशीय क्षेत्रों में पेड़ लगाना तटीय सुरक्षा का विकल्प नहीं हो सकता। उन्होंने जोर देकर कहा, एक अंतर्देशीय जंगल तटीय ढाल का काम नहीं कर सकता।

विशेषज्ञों के अनुसार, मुंबई पहले ही 1970 और 2000 के दशक के बीच अपना 40 फीसद से अधिक मैंग्रोव कवर खो चुका है। मुंबई में समुद्र का स्तर हर साल 4.5 मिमी बढ़ रहा है, ऐसे में मैंग्रोव की कटाई बाढ़ के खतरे को और भयावह बना देगी।

बिल्डर नेक्सस और असुरक्षित घर प्रदर्शन में केवल पर्यावरणविद ही नहीं, बल्कि अपने घरों की सुरक्षा को लेकर डरे हुए आम नागरिक भी शामिल थे। स्थानीय निवासी चंद्रकांत सुवर्णा ने एक गंभीर मुद्दे की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने बताया कि मैंग्रोव क्षेत्रों के पास स्थित इमारतों में कंपन महसूस किए जा रहे हैं। सुवर्णा ने कड़े लहजे में कहा, उन्हें लोगों की परवाह नहीं है। यह बिल्डर नेक्सस का खेल है, उन्हें सिर्फ पैसा चाहिए। उन्होंने संकेत दिया कि मैंग्रोव क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर की जा रही लैंड-फिलिंग (मिट्टी भराव) और निर्माण कार्य जमीन को अस्थिर कर रहे हैं, जिससे लोगों के घरों पर खतरा मंडरा रहा है।

बृहन्मुंबई नगर निगम की योजना 26 किलोमीटर लंबी हाई-स्पीड कोस्टल रोड बनाने की है, जो वर्सोवा से भायंदर के बीच यात्रा के समय को 120 मिनट से घटाकर मात्र 18 मिनट कर देगी। बीएमसी का तर्क है कि इससे सड़कों पर भीड़ कम होगी और ईंधन की बचत होगी। नुकसान की भरपाई के लिए सरकार ने पालघर और चंद्रपुर जैसे दूरदराज के इलाकों में 1.3 लाख पौधे लगाने का वादा किया है। हालांकि, प्रदर्शनकारियों का मानना है कि शहर के फेफड़ों को काटकर सैकड़ों किलोमीटर दूर पेड़ लगाना केवल एक कागजी खानापूर्ति है।