राष्ट्रपति की कुर्सी को भी नहीं बख्शा
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की हालिया यात्रा के दौरान प्रोटोकॉल के कथित उल्लंघन को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी ने केंद्र सरकार की आलोचनाओं का कड़ा जवाब देते हुए भाजपा पर पलटवार किया है।
दक्षिण 24 परगना के मथुरापुर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए, बनर्जी ने भाजपा पर इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया। उन्होंने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का बचाव किया, जो राष्ट्रपति के स्वागत के लिए उपस्थित नहीं थीं। अभिषेक बनर्जी पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा राष्ट्रपति के अपमान और प्रोटोकॉल का पालन न करने के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए बनर्जी ने कहा कि ये आरोप पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित हैं। उन्होंने कहा, उन्होंने राष्ट्रपति की कुर्सी तक को नहीं बख्शा है। वे (भाजपा) हमसे राजनीतिक बदला लेने के लिए राष्ट्रपति के माध्यम से बयान दिलवा रहे हैं।
अभिषेक बनर्जी ने मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति का बचाव करते हुए कहा कि ममता बनर्जी उस समय लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए एक विरोध प्रदर्शन (धरना) में शामिल थीं। उन्होंने तर्क दिया, वे कहते हैं कि हमने राष्ट्रपति का अपमान किया है क्योंकि हमारी मुख्यमंत्री जनता के हितों की रक्षा के लिए धरने में व्यस्त थीं।
इस दौरान बनर्जी ने एक पुरानी तस्वीर का हवाला भी दिया, जिसमें राष्ट्रपति खड़ी थीं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बैठे हुए थे। उन्होंने सवाल किया, मैं आपको एक तस्वीर दिखा रहा हूँ जहाँ राष्ट्रपति खड़ी हैं और पीएम बैठे हैं। अब बताइए कि राष्ट्रपति, बंगाल और राष्ट्र का अपमान कौन कर रहा है?
प्रधानमंत्री मोदी की तीखी आलोचना इससे पहले, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी सरकार पर तीखा हमला बोला था। उन्होंने राष्ट्रपति मुर्मू की यात्रा के दौरान राज्य प्रशासन द्वारा की गई प्रोटोकॉल की बड़ी चूकों को शर्मनाक और अभूतपूर्व करार दिया था।
यह विवाद 9वें अंतरराष्ट्रीय संताल सम्मेलन के स्थान परिवर्तन से भी जुड़ा है। रिपोर्टों के अनुसार, यह सम्मेलन पहले बिधाननगर में होना था, लेकिन अंतिम समय में भीड़भाड़ का हवाला देते हुए इसे बागडोगरा हवाई अड्डे के पास गोसाईपुर में स्थानांतरित कर दिया गया। आयोजकों ने इस अचानक हुए बदलाव और वहां की बुनियादी सुविधाओं की कमी पर भारी असंतोष व्यक्त किया था, जिसे भाजपा ने राष्ट्रपति के अपमान से जोड़कर पेश किया है। अभिषेक बनर्जी के इस बयान ने बंगाल की राजनीति में संवैधानिक मर्यादा बनाम जन सरोकार की एक नई बहस छेड़ दी है।