ऑस्ट्रेलिया ने घटना पर चीन से आपत्ति जतायी
कैनबेराः प्रशांत महासागर और दक्षिण चीन सागर क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच, ऑस्ट्रेलिया और चीन के बीच एक नया राजनयिक विवाद खड़ा हो गया है। ऑस्ट्रेलियाई रक्षा मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर शिकायत दर्ज कराई है कि चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के एक लड़ाकू विमान ने अंतरराष्ट्रीय हवाई क्षेत्र में एक ऑस्ट्रेलियाई सैन्य हेलीकॉप्टर के मार्ग में असुरक्षित और गैर-पेशेवर तरीके से बाधा डाली।
यह घटना पीला सागर के ऊपर अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में हुई। ऑस्ट्रेलियाई रक्षा विभाग के अनुसार, उनका एमएच -60आर सीहॉक हेलीकॉप्टर ऑपरेशन आर्कस के तहत संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों की निगरानी के मिशन पर था। इसी दौरान, एक चीनी जे-10 लड़ाकू विमान ने हेलीकॉप्टर के उड़ान पथ के बेहद करीब (लगभग 300 मीटर ऊपर और 60 मीटर आगे) कई फ्लेयर्स दागे। फ्लेयर्स वे ज्वलनशील पदार्थ होते हैं जो मिसाइलों को भ्रमित करने के लिए छोड़े जाते हैं, लेकिन इतनी कम दूरी पर इनका इस्तेमाल हेलीकॉप्टर के इंजन या रोटर्स के लिए घातक हो सकता है।
ऑस्ट्रेलिया की प्रतिक्रिया और सुरक्षा चिंताएं ऑस्ट्रेलियाई प्रधान मंत्री एंथनी अल्बनीस ने इस घटना को पूरी तरह से अस्वीकार्य बताया है। उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलियाई रक्षा बल अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे में अपना काम कर रहे थे और चीनी पायलट की इस हरकत ने ऑस्ट्रेलियाई चालक दल के सदस्यों के जीवन को खतरे में डाल दिया। ऑस्ट्रेलिया ने बीजिंग के साथ सीधे सैन्य और राजनयिक चैनलों के माध्यम से अपनी गहरी चिंता व्यक्त की है। यह घटना पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के बीच समुद्र और हवा में हुई कई छोटी मुठभेड़ों की कड़ी में नवीनतम है।
चीन का पक्ष और क्षेत्रीय समीकरण दूसरी ओर, चीन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए तर्क दिया है कि ऑस्ट्रेलियाई विमान उसके तटीय हवाई क्षेत्र के करीब जासूसी की नीयत से उड़ान भर रहा था। चीन ने ऑस्ट्रेलिया को चेतावनी दी है कि वह अपनी उकसावे वाली कार्रवाई बंद करे। यह टकराव ऐसे समय में हुआ है जब ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और जापान के साथ मिलकर क्वाड और ऑकस जैसे समझौतों के जरिए हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने की कोशिश कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं भविष्य में एक बड़े सैन्य टकराव का कारण बन सकती हैं।