नेपाल के चुनाव में बदलाव के स्पष्ट संकेत मिले
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पहले इंजीनियर से रैपर बने
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वहां से आंदोलन के अगुवा बने
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अब चुनाव में साफ क्रेज झलका
काठमांडू: नेपाल में 5 मार्च के चुनावों की तैयारी के बीच रविवार को झापा जिले के पूर्वी मैदानों में एक धूल भरी कतार लंबी होती जा रही थी। हर कोई बालेन्द्र शाह के साथ एक सेल्फी चाहता था। वहां मौजूद एक स्वयंसेवक भीड़ को संभाल रहा था और हर समर्थक को बालेन के साथ हाथ मिलाने, मुस्कुराने और फोटो खिंचवाने के लिए बमुश्किल 10 सेकंड मिल रहे थे। एक सात साल की बच्ची ने कहा, मुझे बुखार है, फिर भी मैं बालेन को देखने आई हूं। वहीं एक मध्यम आयु वर्ग की महिला ने स्वीकार किया कि वह अपना हार्ट चेकअप बीच में ही छोड़कर सिर्फ एक फोटो के लिए यहां आई हैं।
भीड़ के केंद्र में बालेन खड़े थे—डार्क ब्लेज़र, तराशी हुई दाढ़ी और उनका सिग्नेचर आयताकार काला चश्मा। उनका यह लुक इतना लोकप्रिय है कि काठमांडू की दुकानों में उनके पसंदीदा फ्रेम खत्म हो गए थे और ऑनलाइन स्टोर आज भी इन्हें बालेन शाह चश्मा के नाम से बेचते हैं। जब बालेन चुनावी मंच पर कदम रखते हैं, तो अक्सर भीड़ भी काली शर्ट और काले चश्मे में उनका अक्स नजर आती है। वे अपना चश्मा केवल कुछ क्षणों के लिए हटाते हैं और कहते हैं, मेरी तरफ देखो। मैं तुमसे प्यार करता हूँ।
बालेन, जो अगले महीने 36 वर्ष के होने जा रहे हैं, झापा-5 निर्वाचन क्षेत्र से 74 वर्षीय केपी शर्मा ओली के खिलाफ संसदीय चुनाव लड़ रहे हैं। ओली चार बार प्रधानमंत्री रह चुके हैं और उन्होंने पांच महीने पहले युवाओं के नेतृत्व में हुए उन विरोध प्रदर्शनों के बाद इस्तीफा दे दिया था, जिसमें 77 लोगों की जान चली गई थी।
काठमांडू में जन्मे बालेन ने सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और भारत से स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग में पोस्ट ग्रेजुएशन किया। 2013 में उन्होंने रॉ बर्ज़ नामक रैप बैटल में हिस्सा लेकर जीत हासिल की। उनके गीतों में भ्रष्टाचार और राजनीतिक ठहराव पर तीखे प्रहार होते थे। एक आयोजक ने बताया, वह एक रैपर से कहीं ज्यादा एक कवि थे, जो दबे-कुचले लोगों की बात करते थे।
सोशल मीडिया पर उनकी लोकप्रियता बेमिसाल है। फेसबुक पर उनके 35 लाख और इंस्टाग्राम व यूट्यूब पर 10-10 लाख फॉलोअर्स हैं। 2022 में एक स्वतंत्र उम्मीदवार के रूप में उन्होंने स्थापित पार्टियों को हराकर काठमांडू के मेयर का चुनाव जीता था। मेयर के रूप में उनका कार्यकाल आक्रामक रहा—अवैध ढांचों पर बुलडोजर चलवाना हो या केंद्र सरकार की निष्क्रियता के विरोध में सिंह दरबार (पीएम कार्यालय) का कचरा उठाना बंद करना, वे हमेशा चर्चा में रहे।
बालेन अब राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के बैनर तले चुनाव लड़ रहे हैं, जो चार साल से भी कम पुरानी पार्टी है। उनका मुकाबला केपी शर्मा ओली की पार्टी सीपीएन यूएमएल से है, जिसकी जड़ें इस क्षेत्र में बहुत गहरी हैं। सितंबर 2025 के विरोध प्रदर्शनों ने नेपाल के राजनीतिक माहौल को पूरी तरह बदल दिया है। बेरोजगारी और भ्रष्टाचार के खिलाफ सड़कों पर उतरे युवाओं के लिए बालेन एक उम्मीद की किरण बन गए हैं। कुवैत से वोट डालने लौटी 25 वर्षीय बिपना ओली कहती हैं, मैं कुवैत में कब तक काम करती रहूंगी, यह बालेन की जीत और उनके द्वारा पैदा किए जाने वाले रोजगार के अवसरों पर निर्भर करेगा।