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बंगाल चुनाव 2026 के लिए BJP का ‘मास्टरप्लान’: 85 मुस्लिम बहुल सीटों के लिए तैयार की अलग रणनीति, ममता के गढ़ में सेंध लगाने की तैयारी

पश्चिम बंगाल के चुनाव सामने है. बीजेपी ने अपनी चुनावी रणनीति को अंतिम रूप दे दिया है. बीजेपी की कोशिश है कि 2019 के लोकसभा और 2021 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को मिली बढत को बरकरार रखा जाए और इन चुनावों की गलतियों को इस बार ना दोहराया जाए. पार्टी राज्य में जारी SIR पर भी सतर्क और तैयार है. बीजेपी इस बार वैसे तो पश्चिम बंगाल की हर विधानसभा सीट पर आक्रामक तरीके से चुनाव लड़ेगी. पर मुस्लिम बहुल सीटों पर बीजेपी टैक्टिकल रणनीति अपनाएगी.

पार्टी नेताओं का कहना है कि राज्य के अल्पसंख्यक मतदाताओं के बीच टीएमसी को बढ़त हासिल है. लिहाजा मुस्लिम बहुल सीटों पर बीजेपी अपना समय और रिसोर्स सोच समझकर इस्तेमाल करेगी. पश्चिम बंगाल विधानसभा की लगभग 70 से 85 सीटों पर जीत हार मुस्लिम मतदाता तय करते हैं. पिछले विधानसभा चुनाव में टीएमसी ने इनमें से 75 सीटें जीती थी जो मालदा, मुर्शिदाबाद, बीरभूम, उत्तर दिनाजपुर और दक्षिण 24 परगना में है.

बीजेपी ने तय किया है कि इन 85 अल्पसंख्यक बहुल सीटों पर सोच समझकर रणनीतिक तौर पर प्रचार और चुनाव प्रबंधन करेगी. इन 85 सीटों की तुलना में बीजेपी बाकी हिंदू मतदाता बहुल सीटों पर ज्यादा फोकस से साथ ही आक्रामक तरीके से प्रचार करेगी, जिसमें बांग्ला और बांग्ला भाषियों के लिए कल्याणकारी वादों -योजनाओं के साथ साथ बेहतर कानून-व्यवस्था का वादा किया जाएगा.

बीजेपी घोषणापत्र में राज्य के विकास के पैकेज का वादा

बीजेपी इस बात पर भी जोर देगी कि जो बंगाल पहले दूसरे राज्यों के लोगों को रोजगार देता था, आज उसी बंगाल के लोग बेहतर रोजगार के अवसर के लिए दूसरे राज्य में जा रहे हैं. बीजेपी सरकार बनने पर रोजगार के अवसर के साथ साथ बंगाल की आर्थिक समृद्धि का वादा भी करेगी.

बीजेपी के घोषणापत्र में भी इन बातों का ध्यान रखा जाएगा. बीजेपी घोषणापत्र में एक मजबूत कल्याणकारी सरकार और राज्य के विकास के पैकेज का वादा होगा ताकि टीएमसी सरकार द्वारा दी जा रही नकद सहायता योजनाओं का मुकाबला किया जा सके.

बीजेपी ने पश्चिम बंगाल में पिछले एक दशक में विस्तार किया है. बीजेपी ने 2021 के विधानसभा चुनाव में 3 सीटों से बढाकर अपना आंकडा 77 सीटें कर ली, हालांकि 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी की सीट का आंकड़ा 18 से घटकर 12 सीटें रह गया था.

हालांकि पार्टी के नेता तर्क देते हैं कि 2024 में सीटें भले कम रही हो पर पार्टी का वोट शेयर लगभग स्थिर ही रहा है, पर पार्टी के नेता 2024 के लोकसभा चुनाव और 2021 के विधानसभा चुनाव की गलतियों को इस बार नहीं दुहराने की बात कर रहे है.

2021 की गलतियों से सबक

2021 में बीजेपी ने रामनवमी के अवसर पर शोभायात्राओं के जरिए राजनीतिक लामबंदी की कोशिश की थी पर इस बार पार्टी अपने अभियानों में बंगाल के सांस्कृतिक प्रतीकों और आइकनों को अधिक प्रमुखता दे रही है. गौरतलब है कि पीएम मोदी ने भी राज्य की अपनी हाल की सभाओं में भाषणों की शुरूआत जय मां काली जैसे उद्घोषों से की थी. इसके पीछे बीजेपी का मकसद हिंदू एकजुटता के साथ ही क्षेत्रीय सांस्कृतिक प्रतीकों को जोड़ने की रणनीति का हिस्सा है.

दूसरा सबक ये कि बीजेपी नेताओं का कहना है कि 2021 के चुनाव मे बीजेपी ने टीएमसी छोडकर आए नेताओं पर ज्यादा भरोसा किया था. नतीजा ये रहा कि जमीन पर कार्यकर्ताओं का मेल नहीं हो पाया, पर इस बार बीजेपी अपने पुराने नेताओं और कार्यकर्ताओं को टिकट बंटवारे में तरजीह देगी.

बीजेपी की कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा वोटर अपने मताधिकार का प्रयोग करें. इसके लिए बीजेपी ने चुनाव आयोग से मांग किया है कि मतदान केंद्रों पर निगरानी के साथ ही अधिक सुरक्षा बलों की तैनाती हो ताकि जाएं और कड़ी निगरानी रखी जाए ताकि मतदाता बिना किसी डर के वोट डाल सके.

राजनीतिक समीकरण के हिसाब से चुनावी तैयारी

बीजेपी ने राज्य की भौगोलिक और राजनीतिक समीकरण के हिसाब से चुनावी तैयारी की है. राज्य के उत्तरी क्षेत्र में बीजेपी ने राजबंशी मतदाताओं , चाय बागान के मजदूरों और अन्य समुदायों के बीच अपना समर्थन बढ़ाया है. इस क्षेत्र में सिलिगुडी, दार्जिलिंग, जलपाईगुडी, कूचबिहार और अलीपुरदुआर शामिल हैं.

पिछले दो चुनावों में बीजेपी ने राज्य के मध्य क्षेत्र में आने वाले इलाकों मसलन हावड़ा, हुगली, पुरूलिया , बर्धमान, मेदिनीपुर में अपनी पकड़ और मजबूत की है, पर दक्षिणी क्षेत्र बीजेपी के लिए असली चुनौती है. हालाँकि पार्टी ने पिछले दस सालों में इन क्षेत्रों में मतुआ, नामशूद्र समुदाय के साथ ही हिंदू शरणार्थियों के बीच मे समर्थन और आधार बढाने की कोशिश की है. दक्षिणी क्षेत्र में उत्तर और दक्षिण 24 परगना और पुराने कोलकात्ता प्रेसीडेंसी क्षेत्र शामिल हैं.