अमेरिकी व्यापार और कूटनीति दौरे की विफलता स्पष्ट
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इजरायल का दौरा इसी वक्त कर आये वह
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ट्रंप से क्यों बार बार गिड़गिड़ा रहे हैं पीएम
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अमेरिकी व्यापार समझौता भी एकतरफा ही है
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः कांग्रेस ने रविवार को कहा कि ईरान पर शुरू हुए युद्ध के प्रति सरकार का रुख भारत के मूल्यों, सिद्धांतों और हितों के साथ विश्वासघात है। पार्टी ने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति की शैली और सार दोनों की ही देश को भारी कीमत चुकानी पड़ रही है।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि स्वयंभू विश्वगुरु के नेतृत्व में भारत की विदेश नीति पूरी तरह से बेनकाब हो गई है, भले ही प्रधानमंत्री और उनके समर्थकों द्वारा इसका कितना भी महिमामंडन क्यों न किया जाए।
रमेश ने कहा, प्रधानमंत्री मोदी ने 25-26 फरवरी, 2026 को इजरायल का दौरा तब किया, जब पूरी दुनिया को पता था कि ईरान में सत्ता परिवर्तन के लिए अमेरिका-इजरायल का सैन्य हमला आसन्न है। यह हमला उनके इजरायल से लौटने के महज दो दिन बाद शुरू हुआ, जहाँ नेसेट (इजरायली संसद) में दिया गया उनका भाषण शर्मनाक नैतिक कायरता का प्रदर्शन था।
यह टिप्पणी ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए एक बड़े हमले में मृत्यु के बाद आई है। खबरों के अनुसार, 86 वर्षीय खामेनेई की तेहरान स्थित उनके परिसर को निशाना बनाकर किए गए हवाई हमले में मौत हो गई।
जयराम रमेश ने आगे कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति पाकिस्तान के साथ अपना रोमांस जारी रखे हुए हैं, और बार-बार उसी व्यक्ति की सराहना कर रहे हैं जिसके भड़काऊ बयानों ने 22 अप्रैल, 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमलों की पृष्ठभूमि तैयार की थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिका ने अफगानिस्तान के खिलाफ पाकिस्तान के युद्ध का खुलकर समर्थन किया है।
कांग्रेस नेता ने 2 फरवरी, 2026 को हुए भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि यह प्रधानमंत्री मोदी द्वारा राहुल गांधी द्वारा संसद में उठाए गए मुद्दों से ध्यान भटकाने का एक हताशापूर्ण प्रयास था। रमेश ने कहा कि यह समझौता एकतरफा है, जिसमें भारत ने आयात (विशेषकर कृषि वस्तुओं) को उदार बनाने के कड़े वादे किए हैं, जबकि अमेरिका ने भारत से आयात बढ़ाने का कोई ठोस वादा नहीं किया है।