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ऑपरेशन त्राशी-1 का जांबाज नायक, गोली खाने के बाद भी नहीं छोड़ा मैदान

अब स्वस्थ हो रहा चार पैरों वाला सैनिक टायसन

राष्ट्रीय खबर

श्रीनगरः जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले की कठिन पहाड़ियों में चलाए गए ऑपरेशन त्राशी-1 ने न केवल आतंकवाद पर करारी चोट की, बल्कि एक ऐसे नायक को भी जन्म दिया जिसने अपनी बहादुरी से पूरे देश का दिल जीत लिया है। यह नायक कोई इंसान नहीं, बल्कि सेना का चार पैरों वाला जांबाज सैनिक—जर्मन शेफर्ड डॉग टायसन है।

रविवार को चटरू बेल्ट के पासेरकुट इलाके में जब सुरक्षा बल जैश-ए-मोहम्मद के दुर्दांत कमांडर सैफुल्लाह और उसके दो साथियों की तलाश में आगे बढ़ रहे थे, तो टायसन ही सेना का मार्ग प्रशस्त कर रहा था। आतंकियों ने एक पहाड़ी की तलहटी में बने ढोक (मिट्टी के घर) में पनाह ले रखी थी। जैसे ही टायसन ने साहस दिखाते हुए उस ठिकाने के अंदर प्रवेश किया, आतंकियों ने उस पर ताबड़तोड़ गोलियां चला दीं।

गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद, टायसन ने अपने कर्तव्यों से पीछे हटने के बजाय और अधिक आक्रामकता दिखाई। सेना की व्हाइट नाइट कोर ने सोशल मीडिया पर इस घटना का ब्यौरा देते हुए लिखा कि अपनी चोटों की परवाह न करते हुए टायसन ने आतंकियों पर जोरदार हमला किया।

इस अचानक हुए हमले से आतंकी घबरा गए और उन्होंने जवाबी फायरिंग की, जिससे उनकी सटीक स्थिति (लोकेशन) का पता चल गया। इसी क्षण ने व्हाइट नाइट कोर, स्थानीय पुलिस और सीआरपीएफ के सैनिकों को एक स्पष्ट लक्ष्य दिया, जिससे वे आतंकियों को घेरने और उन्हें बेअसर करने में सफल रहे।

अधिकारियों के अनुसार, मंगलवार तक टायसन की सेहत में काफी सुधार देखा गया है। उसकी बहादुरी की चर्चा न केवल सेना के भीतर है, बल्कि सोशल मीडिया पर भी लोग उसके जल्द ठीक होने की कामना कर रहे हैं। टायसन का स्वस्थ होना पूरे सुरक्षा बल के लिए एक प्रेरणा है। यह घटना साबित करती है कि भारतीय सेना के अभियानों में इन प्रशिक्षित श्वान सैनिकों की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है, जो अक्सर बिना किसी डर के मौत के मुंह में जाकर भी अपने साथियों की रक्षा करते हैं।