Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
सुकमा नवोदय विद्यालय की छात्रा की बिगड़ी तबीयत: इलाज के लिए दर-दर भटके परिजन, लिवर में सूजन और संक्र... दुर्ग नगर निगम में महापौर अलका बाघमार की इनोवा में लगी भीषण आग: चेंबर में जाते ही धू-धू कर जली गाड़ी... नेपाल की भोटेकोशी नदी में भीषण बाढ़ से तबाही: नेपाल में फंसे छत्तीसगढ़ के नागरिकों के लिए सरकार ने ज... कांकेर में भालुओं का भीषण आतंक: घरों में घुस रहे जंगली भालू, एक दरवाजे में लग रहे 7 ताले; 5 साल में ... बिलासपुर-बेंगलुरु साप्ताहिक एक्सप्रेस का नियमित परिचालन शुरू; रायपुर, दुर्ग, गोंदिया होकर चलेगी ट्रे... रायपुर सेंट्रल जेल: रक्षाबंधन पर बंदियों से मिल सकेंगी बहनें; 100 ग्राम मिठाई की अनुमति, मोबाइल-पर्स... रायपुर में ₹16 लाख के सरकारी राशन का गबन: जोरा में राशन दुकान संचालक टोपेश्वर साहू गिरफ्तार, 389 क्व... छत्तीसगढ़ राज्य खेल अलंकरणों की घोषणा: 82 खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों को मिलेगा सम्मान मंत्री विजय शाह के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति का मामला गरमाया: नेता प्रतिपक्ष ने राज्यपाल को लिखा पत्र सागर-रीवा-शहडोल संभाग में मूसलाधार बारिश की चेतावनी; टीकमगढ़ में नाले उफान पर, भोपाल में सीजन कोटे क...

कई बीमारियों में काम करेगी यूनिवर्सल नेजर स्प्रे वैक्सिन

चिकित्सा विज्ञान की तरक्की से मरीजों को राहत मिलेगी

  • स्टैनफोर्ड के वैज्ञानिकों ने यह कमाल किया

  • इसका असर कई महीनों तक बना रहता है

  • चूहों के बाद अब इंसानी क्लीनिकल ट्रायल

राष्ट्रीय खबर

रांचीः वैज्ञानिकों ने एक ऐसी यूनिवर्सल नेजल स्प्रे वैक्सीन (नाक से दी जाने वाली वैक्सीन) विकसित करने की दिशा में बड़ी सफलता हासिल की है, जो न केवल कोविड-19, बल्कि फ्लू और निमोनिया जैसे कई श्वसन रोगों से सुरक्षा प्रदान कर सकती है। स्टैनफोर्ड मेडिसिन के शोधकर्ताओं द्वारा चूहों पर किए गए इस अध्ययन के परिणाम साइंस पत्रिका में प्रकाशित हुए हैं।

दशकों से वैज्ञानिक एक ऐसी वैक्सीन का सपना देख रहे थे जो किसी भी संक्रामक खतरे से लड़ने में सक्षम हो। अब स्टैनफोर्ड के शोधकर्ताओं ने एक ऐसी प्रयोगात्मक वैक्सीन विकसित की है जो श्वसन संबंधी वायरस, बैक्टीरिया और यहां तक कि एलर्जी के खिलाफ भी सुरक्षा कवच प्रदान करती है। नाक के जरिए स्प्रे के रूप में दी जाने वाली यह वैक्सीन फेफड़ों में व्यापक सुरक्षा पैदा करती है, जो महीनों तक प्रभावी रहती है।

देखें इससे संबंधित वीडियो

अध्ययन के वरिष्ठ लेखक डॉ बाली पुलेंद्रन के अनुसार, इस वैक्सीन ने सार्स-सीओवी-2 (कोविड), अन्य कोरोना वायरस, अस्पतालों में होने वाले सामान्य संक्रमण (स्टेफिलोकोकस और एसिनिटोबैक्टर) और धूल के कणों (एलर्जन) के खिलाफ उम्मीद से बेहतर परिणाम दिए हैं। यदि इंसानों पर भी इसके परिणाम समान रहे, तो यह हर साल लगने वाले अलग-अलग टीकों की जगह ले सकती है और भविष्य की किसी भी महामारी के खिलाफ तत्काल सुरक्षा प्रदान कर सकती है। पारंपरिक टीके एंटीजन स्पेसिफिसिटी पर काम करते हैं, यानी वे शरीर को किसी खास वायरस (जैसे कोविड का स्पाइक प्रोटीन) की पहचान करना सिखाते हैं। समस्या यह है कि वायरस तेजी से अपना रूप बदलते रहते हैं, जिससे पुराने टीके बेअसर हो जाते हैं।

इसके विपरीत, यह नई वैक्सीन शरीर के दो रक्षा प्रणालियों—इनेट (जन्मजात) और एडैप्टिव (अनुकूली) इम्यूनिटी—को आपस में जोड़ देती है। आमतौर पर इनेट इम्यूनिटी बहुत तेजी से काम करती है लेकिन कुछ ही दिनों में खत्म हो जाती है। शोधकर्ताओं ने पाया कि इस नई वैक्सीन के जरिए टी-कोशिकाओं को सक्रिय कर इनेट इम्यूनिटी को महीनों तक सक्रिय रखा जा सकता है।

परीक्षण के परिणाम चूहों पर किए गए परीक्षण में, वैक्सीन की तीन खुराकें लेने वाले चूहे कम से कम तीन महीने तक कोविड और अन्य वायरस से सुरक्षित रहे। बिना टीकाकरण वाले चूहों के फेफड़ों में भारी सूजन देखी गई, जबकि टीकाकृत चूहों के फेफड़ों में वायरस का स्तर 700 गुना तक कम पाया गया।

भविष्य की राह अगला कदम इंसानों पर फेज-1 सुरक्षा परीक्षण करना है। डॉ. पुलेंद्रन का अनुमान है कि पर्याप्त फंडिंग मिलने पर यह यूनिवर्सल वैक्सीन अगले पांच से सात वर्षों में उपलब्ध हो सकती है। यह चिकित्सा जगत में एक क्रांतिकारी बदलाव होगा, जहाँ एक सिंगल नेजल स्प्रे सर्दी-जुकाम से लेकर महामारी तक हर खतरे से बचा सकेगा।

#यूनिवर्सलवैक्सीन #कोविड19 #नेजलस्प्रे #चिकित्साविज्ञान #स्टैनफोर्डयूनिवर्सिटी #UniversalVaccine #NasalSpray #StanfordMedicine #MedicalBreakthrough #FutureOfVaccines