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एयर एम्बुलेंस हादसे में एक और बड़ा खुलासा हुआ

चार साल से उड़ा नहीं था यह विमान

  • हादसे में सात लोगों की जान गयी है

  • चतरा के जंगल में नीचे गिरा विमान

  • ब्लैक बॉक्स नहीं था इस जहाज पर

राष्ट्रीय खबर

कोलकाताः सोमवार रात झारखंड के चतरा जिले के घने जंगलों में एक एयर एम्बुलेंस के दुर्घटनाग्रस्त होने से सात लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। इस हादसे ने विमानन सुरक्षा और नियमों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जांचकर्ताओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इस विमान में कोई ब्लैक बॉक्स (कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर या फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर) नहीं था। नागरिक उड्डयन नियमों के अनुसार, 5,700 किलोग्राम से कम वजन वाले विमानों के लिए सीवीआर या एफडीआर अनिवार्य नहीं है, जिससे अब हादसे के कारणों का पता लगाना बेहद मुश्किल हो गया है।

विमानन विशेषज्ञों का कहना है कि ब्लैक बॉक्स की अनुपस्थिति में अब पूरी जांच एयर ट्रैफिक कंट्रोल के साथ हुए संवाद, मलबे के विश्लेषण और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों पर टिकी है।

दिल्ली स्थित रेडबर्ड एयरवेज प्राइवेट लिमिटेड द्वारा संचालित यह बीचक्राफ्ट सी 90 किंग एयर विमान राँची से दिल्ली जा रहा था, तभी चतरा के जंगलों में गिर गया। विमान में 41 वर्षीय मरीज संजय कुमार, एक डॉक्टर, एक पैरामेडिकल स्टाफ, दो फ्लाइट अटेंडेंट और दो पायलट सवार थे। पायलट विवेक विकास भगत के पास 1,400 घंटे और फर्स्ट ऑफिसर स्वराजदीप सिंह के पास 450 घंटे की उड़ान का अनुभव था।

जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि 1987 में बना यह विमान पिछले चार वर्षों से उपयोग में नहीं था। इसे 2022 में ओरिएंट फ्लाइंग स्कूल से रेडबर्ड एयरवेज ने खरीदा था, लेकिन 2018 से 2022 के बीच यह खड़ा रहा। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि क्या विमान के मौसम रडार में कोई खराबी थी या तकनीकी खामी के कारण पायलट रास्ते से भटक गया। कोलकाता एटीसी के साथ आखिरी संपर्क सुबह 7:34 बजे हुआ था, जिसके बाद वाराणसी से करीब 100 नॉटिकल मील दक्षिण-पूर्व में इसका संपर्क टूट गया। डीजीसीए ने हाल ही में चार्टर ऑपरेटरों के विशेष ऑडिट का निर्देश दिया था, लेकिन क्या इस विमान का निरीक्षण हुआ था, यह अभी जांच का विषय है।