Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Dewas Firecracker Factory Blast: देवास पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट में मौतों का आंकड़ा हुआ 6, आरोपियों पर... Delhi Infrastructure: पीएम गतिशक्ति से मजबूत हुई दिल्ली की कनेक्टिविटी, 'इग्जेम्प्लर' श्रेणी में राज... LU Paper Leak Scandal: 'तुम्हारे लिए पेपर आउट करा दिया है', ऑडियो वायरल होने के बाद असिस्टेंट प्रोफे... Jaunpur News: सपा सांसद प्रिया सरोज की AI जेनरेटेड आपत्तिजनक फोटो वायरल, बीजेपी नेता समेत 2 पर FIR द... Kashmir Terror Hideout: बांदीपोरा में सुरक्षाबलों का बड़ा एक्शन, 'सर्च एंड डिस्ट्रॉय' ऑपरेशन में आतं... Delhi News: दिल्ली में सरकारी दफ्तरों का समय बदला, सीएम रेखा गुप्ता ने ईंधन बचाने के लिए लागू किए कड... Maharashtra IPS Transfer: महाराष्ट्र में 96 IPS अफसरों के तबादले, '12th Fail' वाले मनोज शर्मा बने मु... Aurangabad News: औरंगाबाद के सरकारी स्कूल में छात्रा से छेड़छाड़, टीसी देने के बहाने घर बुलाने का आर... Asansol Violence: आसनसोल में लाउडस्पीकर चेकिंग के दौरान बवाल, पुलिस चौकी पर पथराव और तोड़फोड़ Sabarimala Temple: सबरीमाला मंदिर के कपाट मासिक पूजा के लिए खुले, दर्शन के लिए वर्चुअल बुकिंग अनिवार...

जेलेंस्की और जालुजनी के बीच बढ़ी दरार

यूक्रेन की राजनीति में पूर्व मित्र ही प्रमुख प्रतिद्वंद्वि बने

कीवः यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की और उनके पूर्व सेना प्रमुख वालेरी जालुज़नी के बीच के संबंधों में आई खटास अब केवल अफवाहों तक सीमित नहीं रही है। एक हालिया साक्षात्कार में, जालुज़नी ने उन मतभेदों और वैचारिक टकरावों का खुलासा किया है जिसने युद्ध के एक महत्वपूर्ण मोड़ पर यूक्रेनी नेतृत्व को विभाजित कर दिया था। यह विवाद तब और गहरा गया जब जालुज़नी को उनके पद से हटा दिया गया, जिसके बाद उन्हें जेलेंस्की के सबसे बड़े राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी के रूप में देखा जाने लगा।

विवाद की जड़ें साल 2023 के अंत में गहराईं, जब जनरल जालुज़नी ने युद्ध की स्थिति को गतिरोध करार दिया था। उन्होंने स्वीकार किया था कि रूस के खिलाफ जवाबी हमला वैसी सफलता नहीं पा सका जैसी उम्मीद थी। जेलेंस्की के कार्यालय ने सार्वजनिक रूप से इस बयान की आलोचना की, क्योंकि उन्हें डर था कि ऐसी टिप्पणियों से पश्चिमी सहयोगियों का मनोबल गिर सकता है और सैन्य सहायता में कमी आ सकती है। जेलेंस्की का मानना था कि युद्ध में हार या गतिरोध जैसे शब्दों का प्रयोग रूसी नैरेटिव को मजबूती देता है।

साक्षात्कार के अनुसार, केवल बयानबाजी ही नहीं, बल्कि सैन्य रणनीति को लेकर भी दोनों के बीच भारी असहमति थी। जहाँ जालुज़नी रक्षात्मक रुख अपनाकर सैनिकों की जान बचाने और लंबी अवधि की तैयारी पर जोर दे रहे थे, वहीं राष्ट्रपति कार्यालय त्वरित और दृश्यात्मक सफलताओं के लिए दबाव बना रहा था ताकि वैश्विक समर्थन बना रहे। इसके अतिरिक्त, सेना में भर्ती के नए नियमों को लेकर भी दोनों के बीच ठन गई थी। जालुज़नी 5 लाख नए सैनिकों की भर्ती चाहते थे, जिसे जेलेंस्की ने राजनीतिक रूप से जोखिम भरा और आर्थिक रूप से अव्यावहारिक माना।

यूक्रेन में हुए सर्वेक्षणों में लगातार यह देखा गया कि वालेरी जालुज़नी की लोकप्रियता कभी-कभी राष्ट्रपति जेलेंस्की के बराबर या उससे भी अधिक रही है। उन्हें एक नेशनल हीरो माना जाता है जिन्होंने युद्ध के शुरुआती दिनों में कीव को गिरने से बचाया था। इसी लोकप्रियता ने राष्ट्रपति कार्यालय के भीतर असुरक्षा की भावना पैदा की।

हालाँकि जालुज़नी ने कभी अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं खुलकर जाहिर नहीं कीं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि उनकी स्पष्टवादिता और सैन्य कुशलता उन्हें भविष्य के राष्ट्रपति पद के लिए सबसे मजबूत उम्मीदवार बनाती है। फरवरी 2024 में जालुज़नी को पदमुक्त कर ब्रिटेन में राजदूत नियुक्त करना, इस दरार को भरने की एक कोशिश थी, लेकिन इसने दरार को और स्पष्ट कर दिया। यह स्थिति दर्शाती है कि बाहरी दुश्मन से लड़ते हुए भी, आंतरिक लोकतंत्र और नेतृत्व की महत्वाकांक्षाएं किसी भी राष्ट्र के लिए एक बड़ी चुनौती हो सकती हैं।