संयुक्त अभियान में किश्तवाड़ में जैश के 3 खूंखार आतंकी ढेर
राष्ट्रीय खबर
श्रीनगरः जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले के चतरू के ऊपरी इलाकों में सुरक्षा बलों ने एक बड़ी सफलता हासिल करते हुए जैश-ए-मोहम्मद के तीन आतंकवादियों को मार गिराया है। मारे गए आतंकियों में उनका टॉप कमांडर सैफुल्लाह भी शामिल है। इस मुठभेड़ के साथ ही जैश के सात सदस्यीय मॉड्यूल, जिसे इजराइल ग्रुप के नाम से जाना जाता था, का पूरी तरह सफाया हो गया है। यह ऑपरेशन करीब एक साल से अधिक समय से चल रहा था।
जम्मू के आईजीपी भीम सेन टूटी ने बताया कि यह सात सदस्यीय समूह अप्रैल 2024 में भारतीय सीमा में घुसा था। पिछले डेढ़ साल के दौरान सुरक्षा बलों और इस ग्रुप के बीच 17 अलग-अलग मौकों पर मुठभेड़ हुई। रविवार को हुई कार्रवाई इस लंबे ऑपरेशन का अंतिम चरण थी। आईजीपी ने स्पष्ट किया कि यह मॉड्यूल सुरक्षा बलों और नागरिकों को काफी नुकसान पहुँचा रहा था। उन्होंने चेतावनी दी कि आतंकियों के मददगारों और उन्हें पनाह देने वालों के खिलाफ भी जल्द ही कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
आईजीपी के अनुसार, इस सफलता के बाद अब किश्तवाड़ जिले में केवल तीन स्थानीय आतंकवादी बचे हैं, जो पिछले लगभग दो दशकों से सक्रिय हैं। 2018 से 2020 के बीच भर्ती हुए सभी नए आतंकियों को सुरक्षा बलों ने ढेर कर दिया है। उन्होंने इस सफलता का श्रेय स्थानीय जनता को दिया, जिन्होंने सटीक खुफिया जानकारी साझा कर सुरक्षा बलों का साथ दिया।
काउंटर-इंसर्जेंसी फोर्स डेल्टा के जीओसी, मेजर जनरल ए.पी.एस. बल ने बताया कि यह ऑपरेशन बेहद चुनौतीपूर्ण था। इलाके की कठिन भौगोलिक स्थिति, बारिश, बर्फबारी और भूस्खलन के बावजूद सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और सीआरपीएफ ने मिलकर काम किया। 14 जनवरी को ऑपरेशन शुरू किया गया था। 4 फरवरी को आदिल नाम का आतंकी मारा गया और 22 फरवरी को अंतिम मुठभेड़ में सैफुल्लाह सहित शेष तीन आतंकी ढेर कर दिए गए।
इस ऑपरेशन के दौरान सेना के प्रशिक्षित जर्मन शेफर्ड डॉग टाइसन ने अदम्य साहस का परिचय दिया। आतंकियों की मौजूदगी की पुष्टि करने के लिए जब टाइसन को झोपड़ी (ढोक) के अंदर भेजा गया, तो आतंकियों ने उस पर गोलियां चला दीं। गोली लगने से घायल हुए टाइसन को तुरंत एयरलिफ्ट कर अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसकी स्थिति अब स्थिर बताई जा रही है। मौके से तीन एके-47 राइफलें और भारी मात्रा में युद्ध जैसा सामान बरामद किया गया है।