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खार्किव पर घातक मिसाइल हमले

रूस यूक्रेन युद्ध की आग फिर से अचानक भड़की

कीवः रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष ने आज सुबह एक नया और अधिक हिंसक मोड़ ले लिया। युद्ध के मैदान से लेकर रिहायशी इलाकों तक, विनाश का दायरा बढ़ता जा रहा है। जहाँ एक ओर रूसी मिसाइलों ने यूक्रेन के दूसरे सबसे बड़े शहर खार्किव को निशाना बनाया, वहीं दूसरी ओर यूक्रेन ने रूस के भीतर गहराई तक घुसकर उसके सैन्य बुनियादी ढांचे पर पलटवार करने का दावा किया है।

आज तड़के रूसी सेना ने खार्किव के नागरिक ठिकानों पर कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। यूक्रेनी आपातकालीन सेवाओं की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, एक बहुमंजिला रिहायशी इमारत पर सीधा प्रहार होने से दो नागरिकों की मौके पर ही मौत हो गई। इस हमले में कम से कम सात अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिन्हें मलबे से निकालकर अस्पताल पहुँचाया गया है।

हमले की तीव्रता इतनी अधिक थी कि कई अपार्टमेंट ब्लॉक मलबे के ढेर में तब्दील हो गए हैं। स्थानीय दमकल कर्मी घंटों तक लगी आग पर काबू पाने की कोशिश करते रहे। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि यह हमला बिना किसी पूर्व चेतावनी के हुआ, जिससे लोगों को सुरक्षित ठिकानों (बंकरों) तक जाने का मौका भी नहीं मिला।

इस हमले के कुछ ही घंटों बाद, यूक्रेनी सैन्य खुफिया विभाग ने रूसी सीमा के भीतर एक बड़े ड्रोन ऑपरेशन की घोषणा की। यूक्रेन का दावा है कि उनके आत्मघाती ड्रोनों ने रूस के एक महत्वपूर्ण मिसाइल निर्माण संयंत्र को सफलतापूर्वक निशाना बनाया है। कीव का तर्क है कि यह संयंत्र वही मिसाइलें बनाता है जिनका उपयोग यूक्रेनी शहरों को दहलाने के लिए किया जाता है।

हालांकि, मास्को ने अभी तक किसी भी बड़े नुकसान की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन रूसी टेलीग्राम चैनलों और सोशल मीडिया पर स्थानीय निवासियों द्वारा साझा किए गए वीडियो में कारखाने के पास भीषण धमाके और धुएं का गुबार साफ देखा जा सकता है। राष्ट्रपति जेलेंस्की ने स्पष्ट संदेश दिया है: जब तक हमारी जमीन पर मिसाइलें गिरेंगी, रूस के सैन्य बुनियादी ढांचे सुरक्षित नहीं रहेंगे।

यह नया तनाव उस समय आया है जब डोनबास क्षेत्र (डोनेट्स्क और लुहांस्क) की फ्रंटलाइन पर भीषण आमने-सामने की लड़ाई जारी है। कड़ाके की ठंड और शून्य से नीचे के तापमान ने युद्ध की स्थिति को और अधिक दयनीय बना दिया है। रूसी हमलों ने यूक्रेन के ऊर्जा ग्रिड को भारी नुकसान पहुँचाया है, जिससे लाखों लोग कड़ाके की सर्दी में बिना हीटिंग और पानी के रहने को मजबूर हैं। फ्रंटलाइन के पास के गांवों से नागरिक अब भी पलायन कर रहे हैं, लेकिन परिवहन के साधन नष्ट होने से मानवीय गलियारे बाधित हो रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संयुक्त राष्ट्र और कई यूरोपीय देश तत्काल युद्धविराम की अपील कर रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत केवल और अधिक विनाश की ओर इशारा कर रही है। दोनों पक्ष कूटनीतिक बातचीत के बजाय सैन्य बढ़त हासिल करने पर जोर दे रहे हैं, जिससे यह संघर्ष एक अनंत युद्ध की ओर बढ़ता प्रतीत हो रहा है।