भारत-अमेरिका व्यापारिक संबंधों में नया अध्याय
नई दिल्ली: वैश्विक व्यापार पटल पर भारत की धमक लगातार बढ़ रही है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारत और अमेरिका के बीच होने वाले द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर एक महत्वपूर्ण अपडेट साझा किया है। शुक्रवार को एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने संकेत दिया कि दोनों देशों के बीच हुआ यह व्यापारिक समझौता इस साल अप्रैल 2026 तक धरातल पर उतर सकता है।
वाणिज्य मंत्री ने केवल अमेरिका ही नहीं, बल्कि अन्य देशों के साथ चल रही वार्ताओं पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि ओमान और यूनाइटेड किंगडम के साथ मुक्त व्यापार समझौते की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और ये भी अप्रैल माह से प्रभावी हो सकते हैं। इसके अतिरिक्त, न्यूजीलैंड के साथ व्यापारिक तालमेल सितंबर तक शुरू होने की उम्मीद है। इन समझौतों का उद्देश्य भारतीय उत्पादों के लिए वैश्विक बाजार के द्वार खोलना और आयात-निर्यात को सुगम बनाना है।
भारत-अमेरिका समझौते को अंतिम रूप देने के लिए आगामी 23 फरवरी से अमेरिका में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की जाएगी। तीन दिनों तक चलने वाली इस मंत्रणा में भारतीय पक्ष का नेतृत्व वाणिज्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव दर्पण जैन करेंगे। इस दौरान कानूनी बारीकियों और नीतिगत दस्तावेजों को अंतिम रूप दिया जाएगा। गौरतलब है कि इस डील के तहत अमेरिका भारतीय उत्पादों पर लगने वाले टैरिफ को 25 फीसद से घटाकर 18 फीसद करने पर सहमत हुआ है, जिससे भारतीय निर्यातकों को बड़ी राहत मिलेगी।
व्यापारिक सौदों के बीच, भारत ने तकनीक और रणनीतिक क्षेत्र में भी एक बड़ी छलांग लगाई है। भारत औपचारिक रूप से अमेरिका के नेतृत्व वाले पैक्स सिलिका गठबंधन का हिस्सा बन गया है। इस गठबंधन का मुख्य उद्देश्य सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक बैटरियों के लिए आवश्यक क्रिटिकल मिनरल्स (जैसे लिथियम, कोबाल्ट और ग्रेफाइट) की निर्बाध सप्लाई चेन सुनिश्चित करना है। हस्ताक्षर समारोह में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव और अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर मौजूद रहे। इस गठबंधन में शामिल होने से भारत अब उन चुनिंदा देशों (जैसे जापान, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया और यूके) की कतार में खड़ा हो गया है, जो भविष्य की वैश्विक तकनीक और संसाधनों को नियंत्रित करेंगे।