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एआई की बड़ी सफलता से चीन के वर्चस्व की मिली चुनौती

इलेक्ट्रिक वाहनों में रेयर अर्थ एलिमेंट्स की छुट्टी?

  • टिकाऊ भविष्य की ओर एक कदम

  • एआई ने कैसे किया यह चमत्कार

  • कई नई बातों की जानकारी भी मिली

राष्ट्रीय खबर

रांचीः वैज्ञानिक जगत में एक क्रांतिकारी बदलाव की आहट सुनाई दे रही है। यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू हैम्पशायर के वैज्ञानिकों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग करके उन्नत चुंबकीय सामग्रियों की खोज को एक नई गति दी है। इस शोध के परिणामस्वरूप एक ऐसा विशाल खोज योग्य संसाधन तैयार किया गया है जिसमें 67,573 चुंबकीय यौगिक शामिल हैं। सबसे आश्चर्यजनक बात यह है कि इनमें 25 ऐसी सामग्रियां भी मिली हैं, जिन्हें पहले कभी उच्च तापमान पर काम करने वाले चुंबक के रूप में नहीं पहचाना गया था।

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इस शोध के मुख्य लेखक और भौतिकी के डॉक्टरेट छात्र सुमन इटानी के अनुसार, टिकाऊ चुंबकीय सामग्रियों की खोज में तेजी लाकर हम दुर्लभ मृदा तत्वों पर अपनी निर्भरता कम कर सकते हैं। वर्तमान में इलेक्ट्रिक वाहन और नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियों की लागत इन दुर्लभ तत्वों के कारण बहुत अधिक है। यदि हम इन नए विकल्पों को अपनाते हैं, तो न केवल लागत कम होगी, बल्कि विनिर्माण क्षेत्र को भी मजबूती मिलेगी।

वर्तमान में हमारे स्मार्टफोन, चिकित्सा उपकरण, पावर जेनरेटर और इलेक्ट्रिक वाहन पूरी तरह से शक्तिशाली चुंबकों पर निर्भर हैं। ये चुंबक दुर्लभ मृदा तत्वों से बनते हैं, जो न केवल महंगे हैं, बल्कि इनका आयात और आपूर्ति श्रृंखला भी जटिल और अनिश्चित है।

नेचर कम्युनिकेशंस में प्रकाशित इस अध्ययन में बताया गया है कि टीम ने एक ऐसा एआई सिस्टम विकसित किया जो वैज्ञानिक शोध पत्रों को पढ़ने और उनसे महत्वपूर्ण प्रयोगात्मक डेटा निकालने में सक्षम है। इस डेटा का उपयोग कंप्यूटर मॉडल को प्रशिक्षित करने के लिए किया गया, ताकि यह पता लगाया जा सके कि कोई सामग्री चुंबकीय है या नहीं और वह किस तापमान पर अपना चुंबकत्व खो देती है।

भौतिकी के प्रोफेसर और सह-लेखक जियादोंग जांग ने कहा, हम पदार्थ विज्ञान की सबसे कठिन चुनौतियों में से एक—स्थायी चुंबकों के टिकाऊ विकल्प खोजना—पर काम कर रहे हैं। हमें विश्वास है कि हमारा डेटाबेस और विकसित होती एआई तकनीक इस लक्ष्य को प्राप्त करना संभव बना देगी।

अनुसंधान टीम का मानना है कि इस परियोजना में उपयोग किया गया लार्ज लैंग्वेज मॉडल केवल डेटाबेस बनाने तक सीमित नहीं रहेगा। भविष्य में इसका उपयोग उच्च शिक्षा में पुस्तकालय संग्रहों को आधुनिक डिजिटल स्वरूप में बदलने और छवियों को समृद्ध टेक्स्ट फॉर्मेट में परिवर्तित करने के लिए भी किया जा सकता है। यह खोज न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और तकनीक के भविष्य को एक नई दिशा देने वाली है।

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