जिला अदालत ने पूर्व राष्ट्रपति के खिलाफ फैसला सुनाया
सिओलः दक्षिण कोरिया के लोकतांत्रिक इतिहास में आज एक ऐसा ऐतिहासिक न्याय हुआ है, जिसने यह सिद्ध कर दिया है कि किसी भी राष्ट्र में संविधान की शक्ति सर्वोपरि होती है। सियोल सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने पूर्व राष्ट्रपति यून सुक-योल को विद्रोह भड़काने और असंवैधानिक रूप से मार्शल लॉ लागू करने के गंभीर अपराधों के लिए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
यह पूरा मामला पिछले वर्ष के उस विवादास्पद घटनाक्रम से जुड़ा है, जब तत्कालीन राष्ट्रपति यून सुक-योल ने देश में अचानक मार्शल लॉ की घोषणा कर दी थी। उनके इस कदम ने दक्षिण कोरिया के दशकों पुराने लोकतंत्र को रातों-रात एक अस्थिर तानाशाही की कगार पर खड़ा कर दिया था। हालांकि, जनता के भारी विरोध और संसद द्वारा इस आदेश को सर्वसम्मति से खारिज करने के बाद उन्हें झुकना पड़ा और मार्शल लॉ वापस लेना पड़ा।
अदालत ने अपने व्यापक 400 पन्नों के फैसले में कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि यून का यह कदम विशुद्ध रूप से अपनी राजनीतिक सत्ता को बचाने और लोकतांत्रिक संस्थाओं को पंगु बनाने का एक हताश प्रयास था। न्यायाधीशों ने स्पष्ट किया कि व्यक्तिगत लाभ के लिए राष्ट्र की सुरक्षा और व्यवस्था को दांव पर लगाना अक्षम्य है।
फैसले के समय सियोल की सड़कों पर हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारी जमा थे। जैसे ही उम्रकैद की सजा की खबर बाहर आई, भीड़ ने तालियों और नारों के साथ इस ऐतिहासिक निर्णय का स्वागत किया। गौरतलब है कि अभियोजन पक्ष ने उनके अपराध की गंभीरता को देखते हुए मृत्युदंड की मांग की थी, लेकिन अदालत ने उनके पूर्व राजनीतिक करियर और कुछ विशिष्ट कानूनी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए इसे आजीवन कारावास में तब्दील कर दिया।
यून सुक-योल दक्षिण कोरिया के पांचवें ऐसे पूर्व राष्ट्रपति बन गए हैं जिन्हें पद से हटने के बाद सलाखों के पीछे जाना पड़ा है। उनसे पहले चुनल डू-ह्वान, रोह ताए-वू, ली म्युंग-बाक और पार्क ग्युन-ह्ये को भी विभिन्न भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग के मामलों में जेल की सजा सुनाई गई थी।
यह पैटर्न दिखाता है कि दक्षिण कोरिया की न्यायपालिका कितनी स्वतंत्र और सख्त है। इस फैसले ने पूरी दुनिया के सत्तावादी नेताओं को यह कड़ा संदेश भेजा है कि कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है।वर्तमान सरकार ने न्यायपालिका के फैसले का सम्मान करते हुए देशवासियों से शांति बनाए रखने और भविष्य की ओर बढ़ने की अपील की है।
इस घटना के बाद दक्षिण कोरिया में राष्ट्रपति की शक्तियों को और अधिक सीमित करने और संसदीय नियंत्रण बढ़ाने की मांग तेज हो गई है। आज की यह सजा न केवल यून सुक-योल के राजनीतिक पतन का प्रतीक है, बल्कि यह दक्षिण कोरियाई लोकतंत्र की परिपक्वता और न्याय के प्रति उसकी अटूट प्रतिबद्धता का प्रमाण भी है।