Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
Karnataka IPL Ticket Row: आईपीएल ओपनिंग मैच के लिए हर विधायक को मिलेंगे 2 VIP टिकट, डीके शिवकुमार की... India on Hormuz Crisis: होर्मुज जलडमरूमध्य से 4 भारतीय जहाज सुरक्षित भारत पहुंचे, विदेश मंत्रालय ने ... Middle East Crisis India: मिडिल ईस्ट तनाव पर भारत सरकार की पैनी नजर, राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में बन... Indian Railways Alert: सावधान! चेन पुलिंग करने वालों पर रेलवे का अब तक का सबसे बड़ा एक्शन, दर्जनों ग... Live-in Relationship Law India: नैतिकता अपनी जगह, पर विवाहित पुरुष का लिव-इन में रहना जुर्म नहीं- हा... Rekha Gupta Attacks AAP: दिल्ली विधानसभा में सीएम रेखा गुप्ता का बड़ा हमला, अधूरे प्रोजेक्ट्स और देन... दाहोद से हुंकार: 'सरकार ने आदिवासियों को किया दरकिनार', सीएम मान और केजरीवाल का गुजरात सरकार पर सीधा... बड़ी खबर: जेवर एयरपोर्ट से उड़ान भरने के लिए 20 दिन पहले बुक करें टिकट, फ्लाइट शेड्यूल को लेकर आई ये... PM Modi on West Asia Crisis: पश्चिम एशिया संकट पर मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक, पीएम मोदी बोले- 'टीम इ... Bhopal Crime News: भोपाल में 6 साल की मासूम पर तलवार से हमला, नानी के घर जाते समय हुआ हादसा

सदन  में इस बहस की अध्यक्षता कौन करेगा

ओम बिड़ला पर लगे आरोपों पर आगे की कार्रवाई पर सवाल

  • नोटिस में तकनीकी चूक हुई थी

  • गलत तिथि से खारिज हो सकती थी

  • टीएमसी ने अलग राय जाहिर की थी

राष्ट्रीय खबर

नईदिल्लीः विपक्ष के 118 सांसदों की नोटिस के बाद खुद ओम बिड़ला ने सदन में आना छोड़ रखा है। उनकी तरफ से यह अनौपचारिक सूचना जारी हुई है कि इस मामले की सुनवाई होने तक वह सदन में नहीं आयेंगे। दूसरी तरफ विपक्ष के कई नेता यह मान  रहे हैं कि सदन के भीतर सरकार की जो स्थिति है, उसमें ओम बिड़ला खुद को और विवादों में घिरने से बचा रहे हैं।

जनरल नरवणे की किताब से प्रारंभ होकर यह हमला अमेरिकी व्यापार समझौते होते हुए अब एपस्टीन फाइल तक पहुंच गया है। इन सभी में सरकार के पास संतोषजनक उत्तर नहीं है। दूसरी तरफ मामले को संभालने के लिए निशिकांत दुबे की  नोटिस के सहारे आगे की कार्रवाई की रणनीति बनायी जा रही है।

अध्यक्ष को हटाने की कार्यवाही की अध्यक्षता कौन करेगा? एक संवैधानिक शून्यता जिस पर चर्चा नहीं हो रही

मंगलवार दोपहर को 118 सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पद से हटाने के लिए एक नोटिस प्रस्तुत किया। इस नोटिस में पक्षपातपूर्ण आचरण की चार घटनाओं का हवाला दिया गया: विपक्ष के नेता को बोलने का समय न देना, आठ सांसदों का निलंबन, पूर्व प्रधानमंत्रियों पर व्यक्तिगत हमलों की अनुमति और कांग्रेस सांसदों के खिलाफ झूठे आरोप।

इस पूरे घटनाक्रम में एक बड़ी चूक सामने आई। नोटिस में इन घटनाओं की तारीखें 2, 3 और 4 फरवरी 2025 बताई गईं, जबकि ये घटनाएं वास्तव में पिछले सप्ताह यानी फरवरी 2026 में हुई थीं। लोकसभा सचिवालय द्वारा इन त्रुटियों की पहचान किए जाने के बाद, नियमों के अनुसार इसे सीधे खारिज किया जा सकता था। हालांकि, अध्यक्ष ओम बिरला ने स्वयं निर्देश दिया कि विपक्ष को इन गलतियों को सुधारने का अवसर दिया जाए। इसके बाद विपक्ष ने मूल नोटिस वापस लिया, तारीखें सही कीं और इसे दोबारा प्रस्तुत किया। यह स्पष्ट नहीं है कि यह गलती किसी पुराने टेम्पलेट की नकल करने के कारण हुई या सामान्य लापरवाही थी, लेकिन 118 हस्ताक्षरकर्ताओं में से किसी ने भी इस बड़ी चूक को नहीं पकड़ा।

इस मुद्दे पर विपक्षी गठबंधन के भीतर भी दरार दिखी। तृणमूल कांग्रेस ने इस नोटिस पर हस्ताक्षर करने से साफ इनकार कर दिया। अभिषेक बनर्जी का सुझाव था कि गठबंधन को पहले अध्यक्ष को पत्र लिखकर जवाब के लिए समय देना चाहिए था, लेकिन कांग्रेस ने इस मशवरे को दरकिनार कर सीधे कार्यवाही शुरू करने का फैसला किया।

अब सवाल इस महत्वपूर्ण संवैधानिक शून्यता की ओर संकेत करता है कि यदि अध्यक्ष के खिलाफ ही अविश्वास प्रस्ताव हो, तो सदन की कार्यवाही का संचालन और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किसकी होगी, जिस पर फिलहाल राजनीतिक गलियारों में चुप्पी है।