सरकार ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए आपातकाल लगाया
ब्राजिलियाः दुनिया के सबसे बड़े वर्षावन, अमेज़न, इस समय एक अभूतपूर्व संकट से गुजर रहे हैं। ब्राजील सरकार ने वर्षावनों के एक विशाल हिस्से में लगी भीषण आग के कारण आधिकारिक तौर पर पर्यावरणीय आपातकाल घोषित कर दिया है। उपग्रह से प्राप्त नवीनतम आंकड़ों ने दुनिया भर के वैज्ञानिकों को चिंता में डाल दिया है, क्योंकि पिछले महज 8 घंटों के भीतर आग का दायरा इतनी तेजी से फैला है कि हजारों एकड़ में फैली दुर्लभ जैव विविधता राख होने की कगार पर है।
वैज्ञानिकों और मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, यह आपदा केवल एक संयोग नहीं है। अमेज़न क्षेत्र पिछले कई महीनों से असामान्य गर्मी और रिकॉर्ड तोड़ सूखे का सामना कर रहा है। जलवायु परिवर्तन के कारण एल नीनो जैसे प्रभावों ने वर्षावन की नमी को सोख लिया है, जिससे घने जंगल एक टिनबॉक्स की तरह संवेदनशील हो गए हैं। ऐसी स्थिति में, अक्सर कृषि भूमि साफ करने के लिए लगाई गई छोटी सी आग भी बेकाबू होकर प्राथमिक वनों को अपनी चपेट में ले लेती है।
अमेज़न को अक्सर पृथ्वी के फेफड़े कहा जाता है। हालांकि वैज्ञानिक स्पष्ट करते हैं कि अमेज़न दुनिया की कुल ऑक्सीजन का लगभग 6 प्रतिशत से 9 प्रतिशत हिस्सा पैदा करता है (अक्सर बोलचाल में इसे 20 प्रतिशत कहा जाता है), लेकिन इसकी असली शक्ति कार्बन सिंक के रूप में है। ये जंगल अरबों टन कार्बन डाइऑक्साइड को सोखकर वैश्विक तापमान को नियंत्रित रखते हैं। यहाँ लगी आग न केवल ऑक्सीजन चक्र को प्रभावित कर रही है, बल्कि भारी मात्रा में जमा कार्बन को वापस वायुमंडल में छोड़ रही है, जिससे ग्लोबल वार्मिंग की गति और तेज हो सकती है।
राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला डा सिल्वा ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए सेना को तुरंत ऑपरेशन फायर-फाइट में जुटने का आदेश दिया है। घने जंगलों, सड़कों के अभाव और धुएं के विशाल गुबार के कारण अग्निशमन विमानों और हेलीकॉप्टरों के लिए सटीक निशाना लगाना चुनौतीपूर्ण हो गया है। स्थानीय जनजातीय समूहों और समुदायों के लिए यह अस्तित्व का संकट बन गया है, क्योंकि धुएं के कारण वायु गुणवत्ता सूचकांक खतरनाक श्रेणी को पार कर गया है, जिससे सांस संबंधी बीमारियां फैल रही हैं।
अंतरराष्ट्रीय संगठनों और पड़ोसी देशों ने सहायता की पेशकश की है, लेकिन अमेज़न की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि बिना भारी बारिश के इस आग पर पूर्ण नियंत्रण पाना लगभग असंभव माना जा रहा है। यदि आने वाले कुछ दिनों में कुदरत का साथ नहीं मिला और बारिश नहीं हुई, तो पर्यावरणविदों को डर है कि यह 21वीं सदी की सबसे बड़ी पारिस्थितिक आपदा साबित हो सकती है, जिसका खामियाजा पूरी मानवता को भुगतना पड़ेगा।