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अमेरिकी संसद ने ट्रंप के कनाडा टैरिफ प्रस्ताव को रोका

डोनाल्ड ट्रंप के मनमाने फैसलों पर अब सांसदों ने ब्रेक लगायी

वाशिंगटनः अमेरिकी राजनीति में आज उस समय एक नया मोड़ आ गया जब हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव (निचले सदन) ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस विवादित कार्यकारी आदेश को चुनौती दी, जिसमें कनाडा से आने वाले उत्पादों पर भारी आयात शुल्क लगाने की बात कही गई थी। राष्ट्रपति ट्रंप ने पद संभालते ही सीमा सुरक्षा को सख्त करने और नशीली दवाओं (विशेषकर फेंटानिल) की तस्करी को रोकने के लिए एक कड़ा रुख अपनाया था। इसी के तहत उन्होंने कनाडा और मैक्सिको से होने वाले आयात पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की थी। हालांकि, सदन के इस ताजा फैसले ने प्रशासन की इन योजनाओं पर फिलहाल पानी फेर दिया है।

डेमोक्रेटिक पार्टी के नेतृत्व में विपक्ष ने इस टैरिफ प्रस्ताव का पुरजोर विरोध किया। विपक्ष का मुख्य तर्क यह था कि कनाडा अमेरिका का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। यदि कनाडा से आने वाली वस्तुओं पर 25 फीसद शुल्क लगाया जाता है, तो इसका सीधा बोझ अमेरिकी उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा।

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी थी कि इससे दैनिक उपयोग की वस्तुएं, वाहन, ऊर्जा और खाद्य पदार्थ महंगे हो जाएंगे, जिससे अमेरिका में महंगाई एक बार फिर चरम पर पहुँच सकती है। इसके अलावा, अर्थशास्त्रियों का मानना था कि इस टैरिफ युद्ध से उत्तरी अमेरिकी आपूर्ति श्रृंखला पूरी तरह चरमरा सकती है, जो दशकों के द्विपक्षीय व्यापार समझौतों पर आधारित है।

इस मतदान की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली बात राष्ट्रपति की अपनी पार्टी के भीतर से आई असहमति रही। रिपब्लिकन पार्टी के 6 सांसदों ने पार्टी लाइन से हटकर विपक्ष (डेमोक्रेट्स) का साथ दिया। इन सांसदों का मानना था कि उनके निर्वाचन क्षेत्रों में व्यापार और उद्योग कनाडा से होने वाले आयात पर बहुत अधिक निर्भर हैं, और टैरिफ से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान होगा। इन छह वोटों ने सत्ता पक्ष के गणित को बिगाड़ दिया और अंततः यह प्रस्ताव सदन में गिर गया। राजनीतिक विश्लेषक इसे ट्रंप के अपने दल पर पकड़ और उनकी अमेरिका फर्स्ट आर्थिक नीतियों के लिए एक बड़े झटके के रूप में देख रहे हैं।

व्हाइट हाउस ने इस हार पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। प्रशासन की ओर से जारी बयान में कहा गया कि राष्ट्रपति राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमा सुरक्षा के मुद्दों पर समझौता नहीं करेंगे और वे अपने कार्यकारी विशेषाधिकारों का उपयोग करना जारी रखेंगे। हालांकि सदन ने इसे रोक दिया है, लेकिन यह लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है।

अब यह मामला अमेरिकी सीनेट में जाने की संभावना है। सीनेट में रिपब्लिकन बहुमत के कारण राष्ट्रपति के समर्थकों को उम्मीद है कि वे वहां इस प्रस्ताव को फिर से जीवित कर पाएंगे। यदि सीनेट इसे मंजूरी दे देती है, तो दोनों सदनों के बीच एक बड़ा संवैधानिक और राजनीतिक गतिरोध पैदा हो सकता है। यह घटनाक्रम स्पष्ट करता है कि आगामी वर्षों में ट्रंप प्रशासन के लिए घरेलू नीतियों को लागू करना उतना सरल नहीं होगा, जितना उन्होंने उम्मीद की थी।