Breaking News in Hindi
ब्रेकिंग
MP News: सीधी के फाग गीतों में चढ़ा राजनीति का रंग, पीएम मोदी और स्थानीय सांसद पर लोक गायकों ने बांधे... दिल्ली वालों के लिए जरूरी खबर: राजघाट की ओर जाने वाले ये 5 मुख्य मार्ग प्रभावित, ट्रैफिक जाम से बचने... Bengaluru News: शादी के बाद पति के लिए छोड़ी नौकरी, फिर ससुराल में प्रताड़ना; बेंगलुरु में पूर्व महि... IND vs ENG Semifinal: वानखेड़े में इंग्लैंड से हिसाब चुकता करेगी टीम इंडिया? जानें सेमीफाइनल का पूरा... Bhooth Bangla: सेमीफाइनल से पहले अक्षय कुमार ने टीम इंडिया को दिया खास 'गुड लक', शिखर धवन के साथ की ... Punjabi Youtuber Killed in Canada: मशहूर यूट्यूबर नैन्सी ग्रेवाल की हत्या, हमलावरों ने घर में घुसकर ... ईरान हमले में भारत का नाम! क्या सच में अमेरिकी सेना ने किया भारतीय पोर्ट का उपयोग? विदेश मंत्रालय का... Travel Insurance Claims: विदेश में फ्लाइट रद्द होने पर कैसे पाएं रिफंड? जानें ट्रैवल इंश्योरेंस के ज... अब हर किसी का होगा MacBook! Apple ने लॉन्च किया अपना सबसे सस्ता 'Neo' मॉडल, कीमत सुनकर हो जाएंगे हैर... रावण के भाई का इकलौता मंदिर! 5000 साल पुराना इतिहास और शरीर का सिर्फ एक हिस्सा, जानें इस मंदिर का अन...

चीन ने वाशिंगटन के दावों को झूठा बताया

अमेरिका द्वारा परमाणु परीक्षण के आरोप पर जवाब आया

बीजिंग: चीन और अमेरिका के बीच पहले से ही जारी व्यापारिक और तकनीकी युद्ध अब परमाणु हथियारों की निगरानी के संवेदनशील मुद्दे तक पहुँच गया है। बीजिंग ने आज आधिकारिक तौर पर उन अमेरिकी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया गया था कि चीन ने अपनी पश्चिमी मरुभूमि में गुप्त रूप से कम क्षमता वाले परमाणु परीक्षण किए हैं। इस बयानबाजी ने दोनों महाशक्तियों के बीच तनाव को एक नए और खतरनाक स्तर पर पहुँचा दिया है।

विवाद की जड़ वाशिंगटन द्वारा जारी एक हालिया खुफिया रिपोर्ट है। इस रिपोर्ट में उपग्रह से प्राप्त चित्रों और डेटा का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि चीन के लोप नूर परीक्षण स्थल पर असामान्य हलचल देखी गई है। अमेरिकी विशेषज्ञों का तर्क है कि इस तरह की गतिविधियाँ व्यापक परमाणु परीक्षण निषेध संधि के तहत निर्धारित जीरो यील्ड मानक का उल्लंघन हो सकती हैं। अमेरिका का मानना है कि चीन अपनी परमाणु क्षमता को अधिक सटीक और प्रभावी बनाने के लिए इन गुप्त परीक्षणों का सहारा ले रहा है।

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान इन आरोपों को निराधार और दुर्भावनापूर्ण करार दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका जानबूझकर वैश्विक जनमत को गुमराह कर रहा है ताकि वह अपनी सैन्य विस्तारवादी नीतियों को उचित ठहरा सके। चीन ने तर्क दिया कि वह अपनी राष्ट्रीय रक्षा क्षमताओं को आधुनिक जरूर बना रहा है, लेकिन उसने कभी भी किसी अंतरराष्ट्रीय संधि का उल्लंघन नहीं किया है। प्रवक्ता ने यह भी दोहराया कि चीन हमेशा से पहले परमाणु हमला न करने की नीति पर कायम रहा है।

अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद केवल तकनीकी उल्लंघन तक सीमित नहीं है। यह दोनों देशों के बीच अविश्वास की गहरी खाई को दर्शाता है। यदि यह आरोप-प्रत्यारोप जारी रहता है, तो इससे दक्षिण चीन सागर और ताइवान जैसे मुद्दों पर पहले से जारी तनाव और अधिक भड़क सकता है। सबसे बड़ी चिंता वैश्विक स्तर पर हथियारों की एक नई होड़ शुरू होने की है। यदि दुनिया की दो सबसे बड़ी सैन्य शक्तियाँ परमाणु निगरानी संधियों पर सहमत नहीं होती हैं, तो इससे वैश्विक निरस्त्रीकरण के दशकों पुराने प्रयासों को भारी धक्का लग सकता है।