अब नियमों को बदलने की तैयारी में रक्षा मंत्रालय
राष्ट्रीय खबर
नईदिल्लीः पूर्व थलसेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे के संस्मरण फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी को लेकर जारी विवाद के बीच, रक्षा मंत्रालय (MoD) अब भविष्य में सेना के सेवारत और सेवानिवृत्त कर्मियों द्वारा पुस्तक लेखन को विनियमित करने के लिए नए और विस्तृत दिशा-निर्देश तैयार कर रहा है। वर्तमान में सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारियों के पुस्तक लिखने के लिए कोई एक समेकित कानून नहीं है।
हालांकि आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम जीवनभर लागू रहता है, लेकिन संस्मरणों की समीक्षा के लिए कोई स्पष्ट ढांचा मौजूद नहीं था। अब नए नियमों का उद्देश्य पांडुलिपि की मंजूरी के लिए एक मानक प्रक्रिया निर्धारित करना। राष्ट्रीय सुरक्षा और वर्गीकृत सूचनाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना। सेवारत और सेवानिवृत्त कर्मियों के लिए नियमों में स्पष्टता लाना।
सेवारत कर्मियों के लिए नियम स्पष्ट हैं—उन्हें किसी भी साहित्यिक कार्य के लिए पूर्व अनुमति लेनी होती है। लेकिन सेवानिवृत्त अधिकारियों के मामले में यह एक अस्पष्ट क्षेत्र रहा है। आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम सेवानिवृत्ति के बाद भी लागू रहता है और संवेदनशील जानकारी साझा करना एक दंडनीय अपराध है।
2021 में सरकार ने नागरिक सुरक्षा और खुफिया संगठनों के सेवानिवृत्त अधिकारियों के लिए नियम सख्त किए थे, जिसके तहत बिना अनुमति जानकारी साझा करने पर पेंशन रोकी जा सकती है। अब इसी तरह का कड़ा ढांचा सशस्त्र बलों के लिए भी विचारधीन है।
लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) डी.पी. पांडे के अनुसार, सेना से सेवानिवृत्त होने के बाद व्यक्ति एक नागरिक की तरह स्वतंत्र होता है, लेकिन परिपक्वता और विवेक आवश्यक है। उनका मानना है कि जो जानकारी पहले से सार्वजनिक डोमेन में है, उस पर लिखने में समस्या नहीं होनी चाहिए, लेकिन वर्गीकृत विवरणों के लिए मंत्रालय की अनुमति अनिवार्य होनी चाहिए।
यह पूरी कवायद जनरल नरवणे की पुस्तक के कथित ‘लीक’ होने के बाद शुरू हुई है। पेंगुइन रैंडम हाउस ने स्पष्ट किया है कि किताब अभी प्रकाशित नहीं हुई है, जबकि राहुल गांधी ने संसद में इसकी प्रति होने का दावा किया था। रक्षा मंत्रालय का कहना है कि पिछले 5 वर्षों में 35 पुस्तकों को मंजूरी दी गई है, और केवल नरवणे की किताब ही समीक्षा के कारण लंबित है।