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CM Mohan Yadav News: सीएम मोहन यादव को झंडे दिखाने पर गिरफ्तारी, हवालात में रहने के कारण छूटी नाबालिग की 12वीं की परीक्षा

शहडोल: धनपुरी में कांग्रेसी कार्यकर्ताओं द्वारा सीएम डॉ. मोहन यादव के काफिले को काले झंडे दिखाने की घटना सामने आई थी. पुलिस ने कांग्रेसियों के साथ एक नाबालिग को भी दोषी मानते हुए गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया था. जिसके चलते नाबालिग 12वीं कक्षा की परीक्षा देने से भी छूट गया. कांग्रेस कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी को लेकर कांग्रेस पार्टी के नेता भी मंगलवार को जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय में धरने पर बैठे रहे. लेकिन नाबालिग को जेल भेजने का मामला तूल पकड़ लिया और पूरे दिन यह सियासी गलियों में छाया रहा.

क्या है पूरा मामला?
घटनाक्रम शहडोल जिले के धनपुरी नगर पालिका क्षेत्र का है. जहां रविवार को मुख्यमंत्री मोहन यादव करोड़ों रुपए की लागत से बने वाटर पार्क का लोकार्पण करने पहुंचे हुए थे. इस दौरान मुख्यमंत्री का काफिला गुजर रहा था, तभी बुढार थाना क्षेत्र के सरई कापा रोड गोपालपुर तिराहे के पास कुछ कांग्रेसी कार्यकर्ताओं ने नगर में शुद्ध पेयजल की मांग को लेकर काले झंडे दिखाने शुरू कर दिए. पुलिस ने आनन फानन में कार्रवाई करते हुए तीन युवकों को हिरासत में लिया और उन्हें जेल भी भेज दिया.

हैरानी की बात ये रही कि इसमें शहडोल निवासी नाबालिग जिसकी जन्म तिथि 22 मई 2008 बताई जा रही है, उसे भी जेल में डाल दिया गया. पुलिस ने न तो आधार कार्ड और न ही अन्य दस्तावेजों से उम्र का परीक्षण किया किया और न ही किशोर न्याय अधिनियम का पालन किया. बताया जा रहा है कि नाबालिग कक्षा बारहवीं का छात्र है.

सुबह रिहा किया, लेकिन परीक्षा नहीं दे पाया
10 फरवरी से मध्य प्रदेश में एमपी बोर्ड के कक्षा 12वीं की परीक्षाएं भी शुरू हो चुकी हैं. नाबालिग लड़का कक्षा 12वीं का छात्र है. कांग्रेस जिला अध्यक्ष अजय अवस्थी बताते हैं कि, ”वह कक्षा 12वीं की परीक्षा भी नहीं दे पाया है. एडवोकेट प्रदीप सिंह के मुताबिक, मंगलवार सुबह नाबालिक छात्र को रिहा तो किया गया, लेकिन उसकी परीक्षा भी सुबह 9:00 बजे से ही थी. जेल से छूटने के बाद घर पहुंचने और परीक्षा केंद्र तक पहुंचने के बीच कम समय मिला, जिसके चलते छात्र परीक्षा भी नहीं दे सका.

खुद छात्र बताता है कि, ”उसकी उम्र 17 वर्ष की है. मुख्यमंत्री आए थे तो उसने काले झंडे दिखाए थे जिसकी वजह से उसे गिरफ्तार किया गया. जेल से मंगलवार को 6:00 बजे सुबह ₹50 देकर उन्हें छोड़ दिया गया, और बोला गया की जाओ पेपर देना. लेकिन वह कहता है कि लेट हो जाने की वजह से वो पेपर नहीं दे पाएगा. छोड़ने से पहले उनसे तीन-चार साइन भी थाने में करवाए गए थे.”

जमानत याचिका खारिज की
गिरफ्तार किए गए तीनों कांग्रेसी नेताओं की पैरवी कर रहे वकील प्रदीप सिंह बताते हैं कि, ”छात्र सहित तीन लोगों के ऊपर केस दर्ज करके तहसीलदार के द्वारा उन्हें जेल भेजा गया था. जेल भेजने के बाद, तीनों लोगों का जमानत आवेदन पत्र प्रस्तुत किया था. जमानत के लिए बार-बार प्रयास किया, लेकिन तहसीलदार के द्वारा बार-बार टाला जाता रहा. वह कहते रहे की सक्षम जमानत नहीं है. वकील कहते हैं कि, उन्होंने स्वयं अपना 50 एकड़ का पट्टा पेश कर दिया और बोले ये तो सक्षम जमानत है, छोड़ दीजिए बच्चों की परीक्षा थी.

जब हमने सभी के आधार कार्ड और मार्कशीट मंगवाये तो उसमें वह नाबालिग निकला. जब हमने नाबालिग का मुद्दा उठाया तो प्रशासन की नींद खुली और प्रशासन परेशान दिखा, उसके बाद बोले कि एक व्यक्ति की जमानत कर दे रहे हैं, जो नाबालिग है, बाकी की बाद में विचार करेंगे. हमने कहा कि, जमानत देनी है तो तीनों को दीजिए, तो उन्होंने जमानत खारिज कर दी. हमारा जमानत आवेदन पत्र और पट्टा सब कुछ लौटा दिया. नाबालिग लड़के को मंगलवार को सुबह छोड़ा गया. उससे कहा गया कि तुम बस पकड़ कर अपने घर चले जाओ.” वकील पुलिस के इस रवैये पर भी सवाल उठाते हैं और कहते हैं लड़के को तो पुलिस ने घर भी नहीं छोड़ा, जबकि वो नाबालिग था.”