विद्युत उत्पादन केंद्रों में अचानक आयी बड़ी खराबी
जोहान्सबर्ग: दक्षिण अफ्रीका की राष्ट्रीय बिजली उपयोगिता कंपनी, एस्कॉम ने आज एक अभूतपूर्व तकनीकी विफलता के बाद देश भर में स्टेज 6 लोडशेडिंग लागू करने की घोषणा की है। इस घोषणा ने देश को एक गहरे ऊर्जा संकट में धकेल दिया है, जिससे न केवल आर्थिक गतिविधियाँ प्रभावित हुई हैं, बल्कि आम जनजीवन भी पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है।
एस्कॉम के अनुसार, यह अचानक आया संकट कई प्रमुख उत्पादन इकाइयों में एक साथ आई खराबी का परिणाम है। कंपनी ने बताया कि कई बिजली संयंत्रों में बॉयलर ट्यूब फट गए हैं, जो बिजली उत्पादन की प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं।
इसके अतिरिक्त, खराब मौसम और रसद की समस्याओं के कारण कोयले की आपूर्ति में आई बाधा ने स्थिति को और भी गंभीर बना दिया है। स्टेज 6 लोडशेडिंग का सीधा प्रभाव यह है कि राष्ट्रीय ग्रिड से लगभग 6,000 मेगावाट बिजली कम कर दी गई है। इसका व्यावहारिक अर्थ यह है कि दक्षिण अफ्रीका के अधिकांश क्षेत्रों में अब दिन भर में 8 से 10 घंटे तक बिजली की कटौती की जाएगी।
इस बिजली संकट ने दक्षिण अफ्रीका की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है। स्टेज 6 की कटौती का सबसे गंभीर असर छोटे व्यवसायों से लेकर बड़े विनिर्माण संयंत्रों तक, बिजली के अभाव में उत्पादन पूरी तरह ठप हो गया है। कई कंपनियों ने चेतावनी दी है कि यदि यह स्थिति बनी रही, तो वे परिचालन बंद करने पर मजबूर होंगे।
जोहान्सबर्ग और केप टाउन जैसे महानगरों में ट्रैफिक सिग्नल (रोबोट) बंद होने से सड़कों पर अराजकता की स्थिति है। लंबे समय तक अंधेरा रहने के कारण सुरक्षा एजेंसियां अपराध और चोरी की घटनाओं में वृद्धि की आशंका जता रही हैं। अस्पताल और आपातकालीन क्लीनिक पूरी तरह बैकअप जनरेटरों पर निर्भर हैं। हालांकि, जनरेटर चलाना काफी महंगा है और इनकी ईंधन क्षमता सीमित होती है, जिससे गंभीर मरीजों की जान पर खतरा मंडरा रहा है।
बिजली का यह मुद्दा अब देश के गलियारों में एक बड़ा राजनीतिक संकट बन चुका है। विपक्षी दलों ने एस्कॉम और सरकार पर दशकों के कुप्रबंधन और भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। बेरोजगारी और कम विकास दर से पहले से ही संघर्ष कर रही दक्षिण अफ्रीकी अर्थव्यवस्था के लिए यह बिजली संकट कोढ़ में खाज जैसा साबित हो रहा है।
एस्कॉम के विशेषज्ञों का तर्क है कि यदि यह भारी कटौती नहीं की गई, तो पूरा राष्ट्रीय ग्रिड धराशायी हो सकता है, जिसे ठीक करने में हफ्तों लग सकते हैं। हालांकि प्रशासन ने अगले कुछ घंटों में कुछ इकाइयों के बहाल होने की उम्मीद जताई है, लेकिन पूर्ण सुधार और स्थिरता आने में अभी कई दिनों का समय लग सकता है।