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बांग्लादेश आम चुनाव की राजनीतिक अनिश्चितता

प्रचार के अंतिम दिन में भी सभी पक्षों का जनसंपर्क जारी

ढाका: बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले ऐतिहासिक 13वें आम चुनाव के लिए प्रचार अभियान आधिकारिक रूप से समाप्त हो गया। अगस्त 2024 की छात्र क्रांति के बाद यह देश का पहला लोकतांत्रिक अभ्यास है, जो न केवल नई सरकार चुनेगा बल्कि एक संवैधानिक जनमत संग्रह के माध्यम से देश के बुनियादी ढांचे को भी पुनर्गठित करेगा। बांग्लादेश के इतिहास में यह पहली बार है जब आम चुनाव और जनमत संग्रह एक साथ आयोजित किए जा रहे हैं। 299 संसदीय सीटों के लिए मतदान होगा (एक सीट पर उम्मीदवार की मृत्यु के कारण चुनाव स्थगित)।

जनमत संग्रह के केंद्र में जुलाई चार्टर 2025 है। यदि जनता हाँ में वोट देती है, तो नई संसद एक संविधान सभा के रूप में काम करेगी और सत्ता के विकेंद्रीकरण की प्रक्रिया शुरू होगी। अवामी लीग के चुनाव से बाहर होने और उस पर प्रतिबंध लगने के कारण इस बार चुनावी समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं। मुख्य मुकाबला बेगम खालिदा जिया की बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी के बीच है। हालिया छात्र संघ चुनावों में जमात के बढ़ते प्रभाव ने बीएनपी की चिंताओं को बढ़ा दिया है। आंदोलन से निकली नई पार्टी नेशनल सिटीजन पार्टी भी अपनी जमीन तलाश रही है।

लगभग 8 प्रतिशत हिंदू आबादी और अवामी लीग के पारंपरिक समर्थकों के बीच भारी अनिश्चितता है। सुरक्षा चिंताओं के कारण इस वर्ग का मतदान प्रतिशत चुनाव के परिणामों को प्रभावित कर सकता है। जनमत संग्रह के माध्यम से प्रस्तावित सुधारों का उद्देश्य प्रधानमंत्री की तानाशाही शक्तियों पर लगाम लगाना है। प्रधानमंत्री के पद के लिए अधिकतम दो कार्यकाल की सीमा तय करना। 100 सदस्यीय उच्च सदन का गठन। मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति के लिए एक स्वतंत्र आयोग। सत्ता के बंटवारे के लिए नए पदों का सृजन।

चुनाव आयोग ने निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए कई नए कदम उठाए हैं। पहली बार डाक मतपत्र और नो वोट के विकल्प को प्रभावी ढंग से लागू किया गया है। 42,700 से अधिक मतदान केंद्रों पर सेना और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है।

अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों की एक बड़ी टीम ढाका पहुंच चुकी है ताकि मतदान की पारदर्शिता की पुष्टि की जा सके। डॉ. मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के लिए यह चुनाव उनकी विश्वसनीयता की अंतिम परीक्षा है। यह चुनाव तय करेगा कि क्या बांग्लादेश एक स्थिर लोकतंत्र की ओर बढ़ेगा या राजनीतिक अस्थिरता का नया दौर शुरू होगा।